छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बच्चों के संरक्षण और पिता के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की सिंगल बेंच ने स्पष्ट कहा कि वैवाहिक विवादों के कारण बच्चों को पिता के स्नेह और प्यार से वंचित नहीं किया जा सकता। हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को बरकरार रखा है, जिसमें एक पिता को अपनी 10 वर्षीय बेटी से नियमित रूप से मिलने का अधिकार दिया गया था।
इस मामले में पत्नी ने फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी। उसका तर्क था कि वह वर्तमान में कोलकाता में रह रही है और बच्ची को रायपुर लाना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। इससे बच्ची की पढ़ाई और सुविधा पर भी असर पड़ेगा।
मामले के अनुसार रायपुर निवासी दंपती का विवाह 27 अप्रैल 2013 को पहले हिंदू रीति-रिवाजों और बाद में ईसाई परंपरा के अनुसार संपन्न हुआ था। वर्ष 2015 में उनकी बेटी का जन्म हुआ। पति फिलहाल भोपाल में रह रहा है, जबकि पत्नी कोलकाता में निवास कर रही है।