सुकमा/बीजापुर: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में आज लाल आतंक की कमर टूट गई। एक ओर जगदलपुर में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ‘बस्तर पंडुम’ का शुभारंभ कर रही थीं, वहीं दूसरी ओर सुकमा और बीजापुर में 1.61 करोड़ रुपये के सामूहिक इनामी 51 नक्सलियों ने पुलिस के सामने घुटने टेक दिए। आत्मसमर्पण करने वालों में 34 महिला नक्सली भी शामिल हैं, जो इस बात का संकेत है कि अब नक्सली विचारधारा के भीतर भी विद्रोह की चिंगारी सुलग रही है।
हथियारों का जखीरा: साथ लाए AK-47 और BGL लॉन्चर
यह सरेंडर केवल आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि हथियारों का बड़ा समर्पण भी था। सरेंडर करने वाले नक्सली अपने साथ भारी मात्रा में अत्याधुनिक हथियार लेकर आए, जिनमें शामिल हैं:
• AK-47 राइफलें (3 नग)
• इंसास (INSAS) और SLR राइफलें
• BGL लॉन्चर (बैरल ग्रेनेड लॉन्चर)
• भारी मात्रा में विस्फोटक, जिलेटिन स्टिक और डेटोनेटर।
बड़े नाम और भारी इनाम
बस्तर आईजी सुंदरराज पी. और सुकमा एसपी किरण चव्हाण के सामने हुए इस सरेंडर में कई बड़े ‘कमांडर्स’ भी शामिल हैं।
• इनामी राशि: सुकमा में सरेंडर करने वाले 21 नक्सलियों पर 76 लाख और बीजापुर के 30 नक्सलियों पर 85 लाख का इनाम था।
• प्रमुख नाम: डिविजनल कमेटी मेंबर सोढ़ी महेश, पोडियम राजू और करम ममता (प्रत्येक पर 8-8 लाख का इनाम) जैसे खूंखार चेहरों ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।
नक्सलवाद के अंत की उल्टी गिनती: ‘मिशन 31 मार्च’
यह ऐतिहासिक सरेंडर गृहमंत्री अमित शाह द्वारा तय की गई 31 मार्च 2026 की डेडलाइन से ठीक पहले हुआ है। पुलिस की ‘पूना मारगेम’ (नया रास्ता) पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर ये नक्सली समाज की मुख्यधारा में शामिल हुए हैं।

