बिलासपुर में हाल ही में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक बीमार महिला से ट्रेन एंबुलेंस के नाम पर 65 हजार रुपये की ठगी की गई है। यह घटना न केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी का एक गंभीर उदाहरण भी है।
जानकारी के अनुसार, खड़गपुर निवासी सृष्टि एक्का को 13 सितंबर को रायपुर जाना था। बीमार होने के कारण उन्होंने अपनी यात्रा को सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए पंचमुखी एयर एंड ट्रेन एंबुलेंस सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड खड़गपुर से टिकट बुक कराई। कंपनी ने सृष्टि एक्का से ट्रेन एंबुलेंस के नाम पर 65 हजार रुपये की भारी रकम मांगी और आश्वासन दिया कि उन्हें पूरी यात्रा के दौरान विशेष देखभाल मिलेगी।
हालाँकि, सृष्टि एक्का की यात्रा एक दुःस्वप्न बन गई। जब वे ट्रेन नंबर 12906 हापा एक्सप्रेस में सवार हुईं, तो उन्हें पता चला कि रेलवे प्रशासन के पास ट्रेन एंबुलेंस जैसी कोई सुविधा नहीं है। कंपनी द्वारा दिए गए आश्वासनों के बावजूद, उन्हें A2 कोच में कोई सीट नहीं मिली और उन्हें पूरी यात्रा के दौरान कोच के दरवाजे पर लेटकर रहना पड़ा। यह एक बीमार व्यक्ति के लिए एक अत्यंत कष्टदायी अनुभव रहा होगा।
यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है। सबसे पहले, यह सवाल उठता है कि इस तरह की कंपनियां बिना किसी वैध अधिकार के लोगों को धोखा कैसे दे सकती हैं? क्या रेलवे प्रशासन इस तरह की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए कोई व्यवस्था नहीं रखता है? और सबसे महत्वपूर्ण बात, क्या इस तरह के मामलों में पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए कोई प्रभावी तंत्र है?