80वां स्वतंत्रता दिवस: छत्तीसगढ़ की धरती ने भी लड़ी थी आजादी की लड़ाई, वीरों की गाथा आज भी प्रेरणादायक

रायपुर। देश आज 15 अगस्त 2026 को 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। आजादी के इस गौरवपूर्ण अवसर पर छत्तीसगढ़ के उन वीरों को याद करना जरूरी है, जिन्होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष किया और अपने साहस व बलिदान से स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूती दी।

वीर नारायण सिंह का बलिदान

छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संघर्ष में वीर नारायण सिंह का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। सोनाखान के वीर नारायण सिंह ने 1857 के विद्रोह के दौरान अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया। अकाल के समय उन्होंने जरूरतमंदों के लिए अनाज उपलब्ध कराया। अंग्रेजों ने उन्हें गिरफ्तार कर 10 दिसंबर 1857 को रायपुर में फांसी दी।

भूमकाल विद्रोह और गुंडाधुर

बस्तर में 1910 का भूमकाल विद्रोह अंग्रेजी शासन की नीतियों और आदिवासी अधिकारों में हस्तक्षेप के खिलाफ बड़ा आंदोलन था। इसमें गुंडाधुर प्रमुख नेताओं में शामिल थे। आदिवासी समाज ने जंगल, जमीन और अपने पारंपरिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया।

राष्ट्रीय आंदोलन में भी भागीदारी

बाद के दौर में छत्तीसगढ़ में महात्मा गांधी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय आंदोलनों का प्रभाव भी देखने को मिला। कंडेल नहर सत्याग्रह ने किसानों और आम लोगों को राष्ट्रीय आंदोलन से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। असहयोग आंदोलन समेत कई गतिविधियों में भी प्रदेश के लोगों ने भाग लिया।

80वें स्वतंत्रता दिवस पर वीरों को नमन

15 अगस्त 2026 को देश 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के वीर नारायण सिंह, गुंडाधुर, गेंदसिंह, हनुमान सिंह समेत उन सभी ज्ञात-अज्ञात सेनानियों को याद करना जरूरी है, जिन्होंने संघर्ष और बलिदान से स्वतंत्रता की राह मजबूत की।

छत्तीसगढ़ की यह गौरवशाली गाथा आज भी नई पीढ़ी को साहस, स्वाभिमान और देशभक्ति की प्रेरणा देती है।

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