जन्माष्टमी के छठे दिन, भाद्रपद कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को लड्डू गोपाल की छठी मनाई जाती है। इस वर्ष यह पर्व 1 सितंबर, 2024 को मनाया जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था और उनकी छठी मनाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।
पूजा विधि और महत्व
लड्डू गोपाल की छठी पूजा की विधि हिंदू धर्म के अन्य छठी पूजा की विधि के समान ही है। इस दिन कढ़ी-चावल का भोग लगाया जाता है। माना जाता है कि कढ़ी-चावल का भोग भगवान कृष्ण को बहुत प्रिय है। इसके अलावा, माखन-मिश्री का भोग भी लगाया जाता है।
छठी के दिन बन रहे शुभ योग
इस वर्ष लड्डू गोपाल की छठी के दिन आश्लेषा और मघा नक्षत्र के साथ परिघ और शिव योग भी बन रहा है। सूर्य सिंह राशि में और चंद्रमा कर्क राशि में विराजमान होंगे। इन शुभ योगों के कारण इस दिन की पूजा का महत्व और बढ़ जाता है।
कढ़ी-चावल बनाने की विधि
कढ़ी-चावल बनाने के लिए शुद्धता का विशेष ध्यान रखा जाता है। कढ़ी बनाने के लिए बेसन, अजवाइन, नमक और पानी का गाढ़ा घोल बनाया जाता है। इसमें दही, हल्दी, धनिया, जीरा, हींग और नमक मिलाकर गाढ़ा घोल तैयार किया जाता है। इसे गैस पर पकाकर तड़का लगाया जाता है। अंत में कढ़ी में पकौड़े डालकर परोसा जाता है।
क्यों मनाई जाती है छठी पूजा?
छठी पूजा का महत्व यह है कि इस दिन बच्चे के स्वस्थ जीवन और दीर्घायु की कामना की जाती है। मान्यता है कि छठी पूजा करने से बच्चा स्वस्थ रहता है और उसे किसी भी प्रकार की बीमारी नहीं होती है।
लड्डू गोपाल की छठी एक महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व है। इस दिन भगवान कृष्ण की पूजा-अर्चना की जाती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है। इस पर्व को मनाने से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है।