बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिल्हा ब्लॉक के एक स्कूल में 30 लाख रुपये के फर्जी मेडिकल बिल घोटाले का पर्दाफाश हुआ है। शिक्षक साधे लाल पटेल पर आरोप है कि उन्होंने अपने, अपनी पत्नी और साले के नाम पर फर्जी चिकित्सा बिल जमा किए, जिनमें भारी हेरफेर कर शासन से राशि पास करवा ली गई थी। हालांकि भुगतान से पहले ही एक सतर्क शिकायत के चलते इस पूरे मामले का खुलासा हो गया।
शिकायत से खुला राज, कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश
शिकायतकर्ता धनंजय ने कलेक्टर अवनीश शरण को एक लिखित पत्र देकर शिक्षक के खिलाफ बिंदुवार जानकारी दी। इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी अनिल तिवारी ने तत्काल दो सदस्यीय जांच समिति गठित की, जिसमें SK कश्यप और घनश्याम दुबे को शामिल किया गया है। टीम को शीघ्र रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
फर्जी बिलों की चौंकाने वाली डिटेल:
- 29 अगस्त 2024: ₹77,564 का बिल शिक्षक असीम वर्मा के नाम का था, जिसे आरोपी ने अपने नाम से पेश किया।
- 27 अगस्त 2024: उमाशंकर चौधरी के नाम से ₹5.42 लाख का बिल जमा, असली राशि ₹1.43 लाख थी।
- राजकुमारी पटेल के नाम: ₹4.03 लाख और ₹7.32 लाख के दो बिल प्रस्तुत, जबकि असल बिल ₹47,000 था।
- 18 जनवरी 2022: मृतक नरेंद्र कुमार चौधरी के नाम से ₹5.33 लाख का बिल, जबकि वास्तविक राशि सिर्फ ₹32,000 थी।
इतना ही नहीं, जिन तारीखों में आरोपी शिक्षक ने इलाज के नाम पर बिल लगाए हैं, उन्हीं दिनों में वह स्कूल में उपस्थित पाए गए।
BEO पर भी जांच की आंच
इस घोटाले में बिल्हा ब्लॉक की BEO सुनीता ध्रुव पर भी संदेह जताया जा रहा है, जो वर्तमान में BEO का कार्यभार संभाल रही हैं। उनके द्वारा पास किए गए अन्य मेडिकल बिलों की भी जांच शुरू हो गई है। दोषी पाए जाने पर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।





