नक्सल सरेंडर पर बैज का तीखा सवाल: सरकार के साथ क्या डील हुई? क्या झीरम-2 की प्लानिंग है? साव ने पलटवार किया- कांग्रेस देश तोड़ने वालों के साथ

मुख्य बिंदु

  • नक्सल सरेंडर विवाद: छत्तीसगढ़ में 210 नक्सलियों के बड़े सरेंडर पर कांग्रेस नेता दीपक बैज ने सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि सरेंडर करने वाले सभी असली नक्सली हैं या नहीं? इनका प्रोफाइल क्या है? क्या सरकार के साथ कोई गुप्त डील हुई है?
  • झीरम-2 का जिक्र: बैज ने तंज कसा कि क्या यह झीरम घाटी हमले (झीरम-1) जैसा कोई नया प्लान (झीरम-2) है, जहां नक्सलियों को छोड़ दिया जाएगा? उन्होंने सरेंडर की प्रक्रिया पर संदेह जताया और कांग्रेस सरकार की नीतियों का श्रेय लेने से इनकार किया।
  • साव का जवाब: गृह मंत्री विजय साव (या अमित शाह के संदर्भ में) ने पलटवार किया। कहा, “कांग्रेस देश तोड़ने वालों (नक्सलियों) के साथ खड़ी है। सरेंडर करने वालों का रेड कार्पेट स्वागत हो रहा है, लेकिन कांग्रेस सवालों से मुख्यधारा में आने वालों को बदनाम कर रही है।”

पृष्ठभूमि

  • घटना: 17 अक्टूबर 2025 को बस्तर में 210 नक्सलियों ने 175 हथियारों के साथ सरेंडर किया। यह नक्सल इतिहास का सबसे बड़ा आत्मसमर्पण माना जा रहा है।
  • सरकार का दावा: मोदी सरकार की ‘ऑपरेशन कागर’ और जीरो टॉलरेंस नीति से नक्सलवाद कमजोर। गृह मंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक नक्सल-मुक्त भारत का लक्ष्य दोहराया। सरेंडर करने वालों को मुख्यधारा में लाने पर जोर।
  • कांग्रेस का रुख: बैज ने प्रोफाइल जांच की मांग की। नक्सली खेमे में भी सरेंडर पर बगावत, जहां कुछ नेता सरेंडर करने वालों को ‘गद्दार’ बता रहे हैं।

प्रभाव

  • यह विवाद नक्सल नीति पर राजनीतिक बहस तेज कर रहा है। सरकार सरेंडर को सफलता बता रही, जबकि विपक्ष संदेहास्पद बता रहा। बस्तर जैसे क्षेत्रों में शांति प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।

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