छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।

अदालत ने कोरबा जिले के दो पुराने खनन गड्ढों में उद्योगों को फ्लाई ऐश भरने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यह स्थल अब प्राकृतिक जलाशय का रूप ले चुका है, इसलिए इसे ‘वॉटर बॉडी’ के रूप में ही संरक्षित रखा जाए।

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने आदेश में कहा कि —

“खनन के बाद बने गड्ढों में वर्षा का पानी एकत्र होकर अब जलाशय बन गया है। ऐसे में किसी भी प्रकार की औद्योगिक भराई (Fly Ash Filling) पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा है।”

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फैसले की अहम बातें:

  • यह मामला कोरबा जिले के पुराने पत्थर खदान क्षेत्र से जुड़ा था।
  • स्थानीय प्रशासन ने उद्योगों को वहाँ फ्लाई ऐश डालने की अनुमति दी थी।
  • पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने इसके खिलाफ याचिका दायर की थी।
  • अदालत ने अनुमति को अवैध बताते हुए इसे तुरंत निरस्त कर दिया।
  • साथ ही राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया कि इस स्थल को “प्राकृतिक जलस्रोत” घोषित किया जाए।

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पर्यावरण विशेषज्ञों की राय:

पर्यावरणविदों का कहना है कि यह फैसला छत्तीसगढ़ जैसे खनन प्रधान राज्य के लिए “मील का पत्थर” है।

विशेषज्ञ डॉ. अरविंद पाण्डेय के अनुसार —

“ऐसे निर्णय केवल प्रदूषण रोकने में नहीं, बल्कि भू-जल स्तर और पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने में भी मददगार होते हैं।”

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जनता के लिए इसका मतलब:

अब कोरबा और आसपास के ग्रामीण इलाकों में

  • स्वच्छ जलस्रोत बने रहेंगे
  • स्थानीय जैव विविधता सुरक्षित होगी
  • और ग्रामवासियों को पीने के पानी का बेहतर स्रोत मिलेगा।

यह आदेश राज्य में आने वाले समय में पर्यावरणीय स्वीकृतियों की प्रक्रिया को और सख्त बना सकता है।

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