छत्तीसगढ़ में रजिस्ट्री की नई गाइडलाइन लागू होने के बाद जमीन और मकानों के कारोबार में क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल रहा है। इस बदलाव का सबसे बड़ा असर यह हुआ है कि रियल एस्टेट बाजार से एजेंटों और बिचौलियों का एकाधिकार (Monopoly) लगभग खत्म हो गया है। नई व्यवस्था ने न केवल प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया है, बल्कि अब लोगों को अपनी संपत्ति पर बैंकों से ज्यादा लोन भी मिल रहा है।
गाइडलाइन में बदलाव के 3 बड़े फायदे
1. एजेंटों का हस्तक्षेप खत्म: पहले रजिस्ट्री के लिए एजेंटों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग और पारदर्शी दरों के कारण खरीदार सीधे रजिस्ट्री ऑफिस पहुँच रहे हैं। इससे अवैध कमीशन का खेल बंद हो गया है।
2. ज्यादा लोन की सुविधा: नई गाइडलाइन में संपत्तियों की कीमतें बाजार भाव के करीब लाई गई हैं। सरकारी रेट (Guideline Rate) बढ़ने से बैंकों की वैल्यूएशन बढ़ गई है, जिससे ग्राहकों को प्रॉपर्टी की कीमत का 80 से 90 प्रतिशत तक लोन आसानी से मिल रहा है।
3. कारोबार में उछाल: रजिस्ट्री की प्रक्रिया सरल होने और लोन की उपलब्धता बढ़ने से प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री में तेजी आई है। निवेशक और मध्यम वर्गीय परिवार अब जमीन खरीदने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
राजस्व में भी भारी बढ़ोत्तरी
पंजीयन विभाग के अनुसार, गाइडलाइन की दरों में सुधार और नियमों के सरलीकरण से शासन के राजस्व में भी इजाफा हुआ है। लोग अब कलेक्टर दर और वास्तविक बिक्री मूल्य के अंतर को समझ रहे हैं, जिससे ‘ब्लैक मनी’ का फ्लो कम हुआ है और दस्तावेजीकरण मजबूत हुआ है।
प्रशासन का कहना है कि आने वाले दिनों में रजिस्ट्री की प्रक्रिया को पूरी तरह पेपरलेस और कैशलेस बनाने की दिशा में और भी बड़े कदम उठाए जाएंगे।