बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि पति और उसके परिवार पर दहेज उत्पीड़न तथा टोनही प्रताड़ना के झूठे आरोप लगाना मानसिक क्रूरता माना जाएगा। इसी आधार पर अदालत ने पति की तलाक याचिका स्वीकार करते हुए बलौदाबाजार फैमिली कोर्ट का आदेश निरस्त कर दिया।
जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि पत्नी ने पति और उसके परिजनों के खिलाफ दहेज और टोनही प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसके चलते उन्हें लंबे समय तक मुकदमे का सामना करना पड़ा।
अदालत ने कहा कि ऐसे गंभीर और अपमानजनक आरोपों के कारण पति और उसके परिवार को करीब सात वर्षों तक मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी, जो वैवाहिक संबंधों में मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने पति के पक्ष में तलाक की डिक्री जारी कर दी। साथ ही पत्नी को हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 25 के तहत गुजारा भत्ता के लिए अलग से आवेदन करने की स्वतंत्रता दी गई है।