रायपुर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के क्रियान्वयन को लेकर भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने छत्तीसगढ़ में कई गंभीर खामियां उजागर की हैं। मार्च 2024 तक की अवधि पर आधारित प्रदर्शन लेखा परीक्षा रिपोर्ट मंगलवार को विधानसभा में पेश की गई।
रिपोर्ट के अनुसार, कई ग्राम पंचायतों में ग्राम सभा की मंजूरी के बिना कार्य कराए गए, मानव संसाधनों की कमी रही और मजदूरी भुगतान सहित वित्तीय प्रबंधन में अनियमितताएं पाई गईं। वहीं कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) अंशदान जमा नहीं करने से देनदारी बढ़कर 84.59 करोड़ रुपये हो गई।
सीएजी ने यह भी बताया कि रोजगार मांगने वाले लाखों परिवारों को काम नहीं मिला, जबकि पात्र परिवारों को बेरोजगारी भत्ता भी नहीं दिया गया। रिपोर्ट में निगरानी, सामाजिक अंकेक्षण और योजना के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर कई सुधारात्मक सिफारिशें की गई हैं।



