अनिरुद्धाचार्य ने आरक्षण व्यवस्था का समर्थन करते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों को लेकर अपनी आपत्ति जाहिर की है। उन्होंने कहा कि नियमों में जाति आधारित प्रावधानों को लेकर ऐसी व्यवस्था नहीं होनी चाहिए, जिससे समाज में जातिगत तनाव बढ़े।
अनिरुद्धाचार्य का कहना है कि आरक्षण जरूरतमंद वर्गों के हित में होना चाहिए, लेकिन इसके साथ सामाजिक सौहार्द का भी ध्यान रखा जाना जरूरी है। उन्होंने UGC के नए नियमों को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि किसी भी व्यवस्था का उद्देश्य समाज में विभाजन बढ़ाना नहीं, बल्कि समानता और आपसी सद्भाव को मजबूत करना होना चाहिए।
उन्होंने आरक्षण को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वे आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन ऐसी नीतियों पर विचार जरूरी है जिनसे अलग-अलग वर्गों के बीच दूरी या तनाव बढ़ने की आशंका हो।

