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छत्तीसगढ़ी भाषा के लिए सांसदों से अपील, संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने उठाएं आवाज

Raipur : छत्तीसगढ़ी भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने के लिए एम ए छत्तीसगढ़ी छात्र संगठन के प्रदेश अध्यक्ष ऋतुराज साहू ने प्रदेश के सभी सांसदों से अनुरोध किया है कि वे संसद सत्र में एकमत होकर आवाज उठाएं ताकि इस भाषा को संवैधानिक दर्जा प्राप्त हो सके। अभी संसद सत्र चल रहा है, जिसमें भोजपुरी सुपरस्टार रविकिशन ने एक निजी विधेयक लाकर भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने का अनुरोध किया था।

ऋतुराज साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ी एक बड़े भूभाग की भाषा है और इसमें पर्याप्त साहित्य, व्याकरण, शब्दकोश, और लिपि की उपलब्धता है। इसके अलावा, राज्य सरकार द्वारा इसे 2007 में द्वितीय राजभाषा का दर्जा प्रदान किया जा चुका है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश से 9 से 10 सांसद बीजेपी के चुनकर जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद भी छत्तीसगढ़ी को आठवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए आवाज नहीं उठा पा रहे हैं।

एम ए छत्तीसगढ़ी छात्र संगठन ने संसद सत्र से पहले ही प्रदेश के सभी सांसदों को चिट्ठी भेजकर यह अनुरोध किया था। उम्मीद है कि सांसद रविकिशन से प्रेरणा लेकर छत्तीसगढ़ के सांसद भी अपनी भाषा की पहचान के लिए आवाज बुलंद करेंगे।

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