जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध बस्तर दशहरा की परंपराओं के तहत मां दंतेश्वरी को दशहरा पर्व में शामिल होने का न्योता दिया गया। पंचमी के अवसर पर बस्तर राजपरिवार के सदस्य कमलचंद्र भंजदेव ने 618 साल पुरानी परंपरा का निर्वहन किया। बस्तर की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान से जुड़ी यह परंपरा दशहरा उत्सव का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।
बस्तर दशहरा देश के सबसे अनूठे दशहरा आयोजनों में शामिल है। यहां दशहरा पर्व की परंपराएं स्थानीय संस्कृति, जनजातीय आस्था और धार्मिक मान्यताओं से गहराई से जुड़ी हुई हैं। इस उत्सव की खासियत यह है कि इसकी कई रस्में सदियों से चली आ रही हैं और आज भी पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ निभाई जाती हैं।
मां दंतेश्वरी बस्तर अंचल की आराध्य देवी हैं। दशहरा उत्सव में उनकी विशेष भूमिका रहती है। पंचमी पर न्योता देने की रस्म इसी धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक परंपरा को दर्शाती है।
बस्तर दशहरा केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक भी है। इस उत्सव के दौरान विभिन्न पारंपरिक रस्मों का आयोजन किया जाता है, जिनमें स्थानीय लोगों की गहरी आस्था जुड़ी रहती है।
कमलचंद्र भंजदेव द्वारा परंपरा का निर्वहन बस्तर की ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान को आगे बढ़ाने की एक महत्वपूर्ण कड़ी है।

