रायपुर : सुप्रीम कोर्ट के एससी-एसटी आरक्षण पर फैसले के विरोध में आज देशभर में आयोजित भारत बंद का छत्तीसगढ़ में मिला-जुला असर देखने को मिला है। राज्य के विभिन्न जिलों में बंद का प्रभाव अलग-अलग रहा है।
रायपुर में शांतिपूर्ण माहौल
राजधानी रायपुर में भारत बंद का कोई खास असर नहीं दिखा। शहर में सभी स्कूल-कॉलेज, बस सेवाएं, पेट्रोल पंप और दुकानें सामान्य रूप से खुली रहीं। हालांकि, पुलिस प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर रहा।
बिलासपुर में मिला-जुला असर
बिलासपुर शहर में बंद का मिला-जुला असर देखा गया। कुछ इलाकों में दुकानें बंद रहीं, जबकि अन्य इलाकों में दुकानें खुली रहीं। जिले के स्कूल और कॉलेज सामान्य रूप से संचालित हुए।
कांकेर में पूर्ण बंद
कांकेर जिले में आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण बंद का व्यापक असर देखा गया। भानुप्रतापपुर, अंतगढ़, पखांजूर, दुर्गूकोंदल जैसे क्षेत्रों में सभी व्यवसायिक प्रतिष्ठान, शिक्षण संस्थान और आवागमन पूरी तरह से बंद रहे। शासकीय कार्यालयों में भी बंद का प्रभाव देखा गया। आम रास्तों को भी बाधित किया गया जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ।
क्यों किया गया भारत बंद?
नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ दलित एंड आदिवासी ऑर्गेनाइजेशन्स (NACDAOR) ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए न्याय और समानता की मांग को लेकर भारत बंद का आह्वान किया था। संगठन का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला इन समुदायों के आरक्षण को कमजोर कर सकता है।
छत्तीसगढ़ में बंद को मिला समर्थन
छत्तीसगढ़ में बहुजन समाज पार्टी, सर्व आदिवासी समाज और भारतीय बौद्ध महासभा ने भारत बंद को समर्थन दिया। सर्व आदिवासी समाज के कार्यकारी अध्यक्ष ने कहा कि छत्तीसगढ़ में बंद का असर दिख रहा है।
छत्तीसगढ़ यातायात महासंघ और छत्तीसगढ़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स ने बंद का विरोध किया। इन संगठनों का मानना है कि बंद से आम जनता को परेशानी होती है। राज्य भर में पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड पर रहा। पुलिस ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए थे।
छत्तीसगढ़ में भारत बंद का प्रभाव अलग-अलग जिलों में अलग-अलग रहा। जहां रायपुर में शांतिपूर्ण माहौल रहा, वहीं कांकेर जैसे आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में बंद का व्यापक असर देखा गया।