रायपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राज्य लोक सेवा आयोग (पीएससी) को वर्ष 2005 की मुख्य परीक्षा की आंसरशीट परीक्षार्थी को उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों के अनुसार परीक्षार्थी को आंसरशीट प्राप्त करने का अधिकार है।
क्या था मामला?
दुर्ग निवासी प्रवीण चंद्र श्रीवास्तव ने वर्ष 2005 में पीएससी की मुख्य परीक्षा दी थी। उन्होंने सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत मुख्य परीक्षा की आंसरशीट की कॉपी मांगी थी, लेकिन पीएससी के जनसूचना अधिकारी ने उनकी अर्जी खारिज कर दी थी। इसके बाद श्रीवास्तव ने राज्य सूचना आयोग में अपील की। आयोग ने वर्ष 2015 में पीएससी को आंसरशीट देने का आदेश दिया था।
पीएससी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया
पीएससी ने वर्ष 2015 में ही हाईकोर्ट में इस आदेश को चुनौती दी थी। पीएससी की दलील थी कि आंसरशीट देने से परीक्षा प्रक्रिया प्रभावित होगी और भविष्य में परीक्षार्थी अन्य परीक्षाओं की आंसरशीट भी मांग सकते हैं।
हाईकोर्ट का फैसला
हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद पीएससी की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि परीक्षार्थी आंसरशीट की कॉपी प्राप्त करने का हकदार है। कोर्ट ने राज्य सूचना आयोग के आदेश को बरकरार रखते हुए पीएससी को मुख्य परीक्षा 2005 के वैकल्पिक विषयों लोक प्रशासन और मानव विज्ञान के सभी सात प्रश्नपत्रों की आंसरशीट श्रीवास्तव को देने का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला
कोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा कई मामलों में दिए गए निर्णयों का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि परीक्षार्थी को अपनी परीक्षा की आंसरशीट प्राप्त करने का अधिकार है। यह अधिकार सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत दिया गया है।
परीक्षार्थी का हक
यह फैसला परीक्षार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण जीत है। अब परीक्षार्थी अपनी परीक्षा की आंसरशीट देखकर यह समझ सकते हैं कि वे किस प्रश्न में कहां गलती कर गए थे। इससे उन्हें अपनी कमजोरियों को जानने और भविष्य में बेहतर प्रदर्शन करने में मदद मिलेगी।
पीएससी के लिए चुनौती
पीएससी के लिए यह फैसला एक चुनौती है। अब पीएससी को सभी परीक्षाओं की आंसरशीट सुरक्षित रखनी होगी। इसके लिए पीएससी को अपनी प्रक्रियाओं में बदलाव करने होंगे।

