बिलासपुर। करीब 17.24 करोड़ रुपये के कथित सर्पदंश मुआवजा घोटाले की जांच का असर अब बिलासपुर तहसील कार्यालय के कामकाज पर भी दिखने लगा है। जांच के दौरान कर्मचारियों से पूछताछ और कार्रवाई के बाद कार्यालय में स्टाफ की कमी की स्थिति बन गई है।
मामले में अब तक राजस्व विभाग के कर्मचारियों समेत डॉक्टर, वकील और अन्य लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। आरोप है कि फर्जी दस्तावेज और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के जरिए मौतों को सर्पदंश से जोड़कर सरकारी मुआवजा हासिल किया गया।
जांच आगे बढ़ने के साथ अन्य राजस्व कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका भी खंगाली जा रही है। इसके चलते तहसील कार्यालय के कर्मचारियों में कार्रवाई को लेकर चिंता बनी हुई है और नियमित कामकाज प्रभावित होने की आशंका है।
जांच एजेंसियां मुआवजा प्रकरणों, सरकारी रिकॉर्ड, दस्तावेजों और भुगतान प्रक्रिया की पड़ताल कर रही हैं। मामले में आगे और गिरफ्तारियां एवं कार्रवाई होने की संभावना है।


