रायपुर। छत्तीसगढ़ में कैबिनेट विस्तार को लेकर कई दिनों से जारी अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हाल ही में संकेत दिए थे कि कभी भी मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है, लेकिन अब नई जानकारी सामने आई है कि यह प्रक्रिया भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के बाद ही आगे बढ़ेगी।
विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक, भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व जल्द ही इस मुद्दे पर प्रदेश नेतृत्व के साथ बैठक कर अंतिम निर्णय करेगा। पार्टी के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि भले ही राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव का कैबिनेट विस्तार से कोई सीधा संबंध न हो, लेकिन कुछ अहम सिफारिशों और समन्वय को लेकर चर्चा ज़रूरी मानी जा रही है।
जल्द हो सकती है बैठक
इस सिलसिले में हाल ही में प्रदेश प्रभारी नितिन नबीन और राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री शिवप्रकाश ने रायपुर पहुंचकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के साथ दो दिन तक गहन मंत्रणा की थी। बैठक में संगठन महामंत्री अजय जामवाल और पवन साय भी शामिल रहे। इसके बाद से कैबिनेट विस्तार को लेकर चर्चाओं ने और रफ्तार पकड़ ली थी।
फिलहाल सरकार में 11 मंत्री, 3 पद होंगे खाली
वर्तमान में मुख्यमंत्री समेत कुल 11 मंत्री हैं। बृजमोहन अग्रवाल के सांसद बनने के बाद एक पद पहले से रिक्त है, और हरियाणा फार्मूला लागू होने के बाद मंत्रिमंडल में एक अतिरिक्त पद जोड़ा जाएगा। इस तरह कुल मिलाकर 3 नए मंत्रियों की नियुक्ति संभावित है।
संभावित नामों की चर्चा
भाजपा के आंतरिक सूत्रों और सोशल मीडिया ग्रुपों में चल रही चर्चाओं के मुताबिक तीन नाम सबसे अधिक चर्चाओं में हैं:
- अमर अग्रवाल: पूर्व मंत्री और जीएसटी काउंसिल के सबसे लंबे समय तक सदस्य रहे अमर अग्रवाल का मंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है। वे रिजल्ट ओरिएंटेड काम के लिए जाने जाते हैं और रमन सरकार में आबकारी नीति के बदलावों के पीछे अहम चेहरा रहे हैं।
- गजेंद्र यादव: संघ पृष्ठभूमि से आने वाले और यादव समाज का प्रतिनिधित्व करने वाले गजेंद्र यादव को ओबीसी वर्ग में संतुलन साधने के लिए मंत्री बनाए जाने की अटकलें तेज हैं।
- पुरंदर मिश्रा या कोई और: तीसरे नाम को लेकर स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है। सोशल मीडिया पर पुरंदर मिश्रा का नाम चल रहा है, लेकिन रायपुर पश्चिम के विधायक राजेश मूणत और कुरुद से विधायक अजय चंद्राकर भी रेस में बने हुए हैं। इस पद को लेकर संगठन के भीतर खींचतान जारी है।
निष्कर्ष
फिलहाल पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव प्राथमिकता में है और उसी के बाद मंत्रिमंडल विस्तार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। अब निगाहें इस महीने होने वाले अध्यक्ष चुनाव और उसके बाद संभावित मंत्रियों की शपथ पर टिकी हुई हैं।