बिलासपुर। नारायणपुर के चर्चित नक्सल प्रकरण में आरोपियों को मिली डिफॉल्ट बेल के खिलाफ राज्य सरकार की अपील को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि केवल सरकारी प्रक्रियाओं और फाइलों के लंबित रहने का हवाला देकर देरी को माफ नहीं किया जा सकता।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने 182 दिन की देरी को लापरवाहीपूर्ण बताते हुए अपील निरस्त कर दी।
मामला ओरछा थाना, नारायणपुर में दर्ज नक्सल प्रकरण से जुड़ा है, जिसमें आरोपियों को सितंबर 2025 में विशेष अदालत ने डिफॉल्ट बेल दी थी। राज्य सरकार ने इस फैसले को चुनौती दी, लेकिन तय समयसीमा से 182 दिन बाद हाईकोर्ट पहुंची।
सरकार की ओर से विभागीय प्रक्रिया और मंजूरी में देरी का हवाला दिया गया, जिसे कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि कानून की समयसीमा सरकार पर भी समान रूप से लागू होती है और रेड टेप के आधार पर राहत नहीं दी जा सकती।

