छत्तीसगढ़ के गठन को अब 25 साल पूरे हो चुके हैं। 1 नवंबर 2000 को बना यह राज्य, आज देश के सबसे युवा राज्यों में से एक होते हुए भी — विकास, संसाधन और सांस्कृतिक पहचान के कई महत्वपूर्ण अध्याय लिख चुका है।
बीते ढाई दशकों में राज्य ने कई मोर्चों पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। चाहे धान का कटोरा कहे जाने की कृषि क्षमता हो, खेलों में उभरती प्रतिभा हो, जनजातीय कला की वैश्विक पहचान हो या फिर स्टील और खनिज आधारित उद्योग — छत्तीसगढ़ ने लगातार अपने स्तर को आगे बढ़ाया है।
इन 25 वर्षों में राज्य का एक बड़ा बदलाव कनेक्टिविटी और आधारभूत संरचना में दिखा। नए हाइवे, एक्सप्रेसवे, ग्रामीण सड़कें और तेज़ी से बढ़ता शहरी विस्तार — यह संकेत है कि राज्य सिर्फ संसाधनों में नहीं, बल्कि व्यवहारिक उपयोग और सुविधा में भी मजबूत हुआ है।
सांस्कृतिक रूप से — छत्तीसगढ़ ने अपनी लोक परंपराएं, नाचा, पंथी, सूफी परम्परा और लोक गाथाओं को वैश्विक मंच तक पहुँचाया है। आज दुनियाभर में लोग छत्तीसगढ़ी गीतों, डांस फॉर्म और नाट्य शैलियों को नोटिस कर रहे हैं।
शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में भी अनेक बदलाव दिखने लगे हैं। स्थानीय उत्पादों और वन संसाधनों पर आधारित ग्रामीण मार्केट मॉडल (Value Chain) ने गांवो में आत्मनिर्भरता की एक नई सोच तैयार की है।
25 साल की यह यात्रा सिर्फ समय नहीं — यह चेतना, मेहनत और पहचान की एक मजबूत यात्रा है।
अब चुनौती और उम्मीद — अगले दशक की है।इस यात्रा को और स्थिर, टिकाऊ और रोजगार आधारित बनाना ही अगले चरण का असली लक्ष्य होगा।

