तालाब बना जहरीला पानी का जहर! तालाब संरक्षण में करोड़ों डूबे, लेकिन नतीजा ‘जीरो’

रायपुर। छत्तीसगढ़ के नदियों और तालाबों की सफाई व संरक्षण को लेकर नगर निगम और प्रशासन की लापरवाही लगातार सामने आ रही है। करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद तालाबों और डेम की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। कहीं तालाब जलकुंभी और गंदगी से पटे हैं, तो कहीं जहरीला पानी लोगों की सेहत के लिए खतरा बन चुका है।

रतनपुर का कृष्ण अर्जुनी तालाब बदहाल

मां महामाया की नगरी कहलाने वाले रतनपुर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाला कृष्ण अर्जुनी तालाब आज बदहाली की भेंट चढ़ चुका है। कभी धार्मिक कार्यों और पूजा-पाठ के लिए प्रसिद्ध यह तालाब अब बदबू और जहरीले पानी का गढ़ बन गया है। हालत यह है कि यहां अब न तो पूजा-पाठ हो पा रहा है और न ही अंतिम संस्कार जैसे निस्तारी कार्य। मजबूरी में लोग महामाया ट्रस्ट से टैंकर मंगाकर काम चला रहे हैं।

स्थानीय संगठन आजाद मंच ने तालाब की दुर्दशा पर कड़ा विरोध जताया है। संगठन का आरोप है कि जनता जहरीले पानी से परेशान है, जबकि नगर पालिका अध्यक्ष पर्यटन में व्यस्त हैं। मंच ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही तालाब की सफाई और संरक्षण के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो बड़ा जन आंदोलन किया जाएगा। लोगों का कहना है कि यह तालाब सिर्फ जलस्रोत नहीं बल्कि धार्मिक आस्था और ऐतिहासिक धरोहर है, जिसे बचाना बेहद जरूरी है।

सिकासेर डेम में हजारों मरी मछलियां

इधर, गरियाबंद जिले के सिकासेर डेम से भी चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। यहां आज हजारों मरी हुई मछलियां पानी में तैरती मिलीं। इससे न केवल डेम का पानी दूषित हो गया है बल्कि आसपास के गांवों के लोग भी भय और आक्रोश में हैं। स्थानीय लोग इस पानी का उपयोग पीने और खाना बनाने तक के लिए करते हैं, जिससे उनकी सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

निवासियों का आरोप है कि मछली पालन करने वाले प्राइवेट ठेकेदारों ने ही इन मछलियों को डेम में फेंका है। हालांकि अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

सवालों के घेरे में प्रशासन

तालाब और डेम की लगातार बिगड़ती स्थिति ने प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करोड़ों खर्च होने के बावजूद जलस्रोतों का संरक्षण नहीं हो पा रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में यह समस्या और भी विकराल हो सकती है।

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