रायपुर। महिला एवं बाल विकास विभाग में आंगनबाड़ी केन्द्रों के लिए की गई खरीदी में भारी गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के मामले ने तूल पकड़ लिया है। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, जशपुर और सरगुजा जिलों में सामग्री की गुणवत्ता में गंभीर खामियां सामने आई हैं। विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये का यह घोटाला अंजाम दिया गया है।
प्रदेशभर से शिकायतें मिलने के बाद महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष जांच समिति गठित की थी। समिति ने संबंधित जिलों में जाकर सामग्रियों की भौतिक स्थिति और गुणवत्ता मानकों की गहराई से जांच की। मंत्री ने पखवाड़े भर में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद प्रारंभिक रिपोर्ट उन्हें सौंप दी गई है।
सूत्रों के अनुसार, संदेहास्पद सामग्रियों को अब वैज्ञानिक परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। हालांकि अंतिम रिपोर्ट अभी लंबित है, लेकिन प्रारंभिक रिपोर्ट में ही कई अनियमितताओं की पुष्टि हो चुकी है।
40 करोड़ की खरीदी पर उठे सवाल
बताया जा रहा है कि विभाग में करीब 40 करोड़ रुपये की सामग्री की खरीदी की गई थी। इसमें से अधिकांश सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठे हैं। अफसरों और आपूर्तिकर्ताओं की मिलीभगत की चर्चा विभाग के अंदर तेज है। शिकायतों का यह सिलसिला नया नहीं है—पहले भी आंगनबाड़ी केंद्रों में वितरित की जा रही सामग्रियों की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो चुके हैं।
कार्रवाई पर नजरें टिकीं
प्रारंभिक रिपोर्ट मिलने के बावजूद अभी यह स्पष्ट नहीं है कि राज्य सरकार तत्काल कोई कार्रवाई करेगी या नहीं। हालांकि मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े पहले ही इस मामले में कड़ी कार्रवाई के संकेत दे चुकी हैं। जीरो टॉलरेंस की नीति का हवाला देते हुए अब अफसरों की जवाबदेही तय होने की उम्मीद जताई जा रही है।

