रायपुर/गांधीनगर: छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम (TBC) की अनूठी बारकोड प्रणाली को गुजरात सरकार ने अपनाने का फैसला किया है। इस फॉर्मूले से छत्तीसगढ़ ने वर्तमान शैक्षणिक सत्र में 50 करोड़ रुपये की बचत की, जो पारदर्शिता और डिजिटल ट्रैकिंग का नतीजा है। गुजरात के शिक्षा विभाग ने TBC मॉडल का अध्ययन कर इसे राज्य स्तर पर लागू करने की अधिसूचना जारी की।
बारकोड सिस्टम की खासियत: TBC ने प्रत्येक पाठ्यपुस्तक पर दो बारकोड लगाए—एक प्रिंटर की पहचान के लिए, दूसरा वितरण विद्यालय के लिए। स्कैनिंग से डुप्लीकेशन, अवैध बिक्री और दुरुपयोग रुक गया। कक्षा 1 से 10 तक मुफ्त पुस्तकों का वितरण डिपो से सीधा स्कूलों तक, जिला अधिकारियों के बजाय। तकनीकी दिक्कतों पर CM विष्णु देव साय ने प्राइवेट स्कूलों को 7 दिन की मोहलत दी।
50 करोड़ बचत का राज: पारदर्शी पेपर खरीद से। पिछली सरकार में 10,000 टन पेपर 113 रुपये/किलो (जीएसटी सहित 125) पर खरीदा गया। नई व्यवस्था में 78 रुपये/किलो पर ही मात्रा खरीदी, 50 करोड़ सीधी बचत। CM साय बोले, “भ्रष्टाचार पर प्रहार, बच्चों की शिक्षा मजबूत।”
ट्रक चिप और कार्रवाई: कागज परिवहन ट्रकों में GPS चिप अनिवार्य। लोकेशन-मूवमेंट रीयल-टाइम ट्रैक। 4 कंपनियों पर अनियमितता पाई—ओवरप्राइसिंग, बोगस बिलिंग। इन पर ब्लैकलिस्टिंग, वसूली की कार्रवाई शुरू। TBC अध्यक्ष राजा पांडेय: “यह मॉडल गुजरात के लिए बेंचमार्क बनेगा।”
गुजरात में 2026 सत्र से लागू। छत्तीसगढ़ ने बिहार मॉडल रिजेक्ट कर अपना सिस्टम मजबूत किया। शिक्षा मंत्री बोले, “डिजिटल इंडिया का असली उदाहरण।”





