बिलासपुर। गांव-गांव इंटरनेट पहुंचाने वाली भारतनेट फेज-2 परियोजना को लेकर बड़ा कानूनी विवाद सामने आया है। 3056 करोड़ रुपये की इस योजना से जुड़ी टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। कंपनी ने मध्यस्थता ट्रिब्यूनल के लिए दूसरे पंच की नियुक्ति की मांग की है।
टाटा का कहना है कि खुदाई की अनुमति में देरी, भुगतान न मिलना, जुर्माना और बैंक गारंटी भुनाए जाने जैसे कारणों से परियोजना प्रभावित हुई। लगातार विवाद के चलते कंपनी ने मई 2025 में अनुबंध समाप्त कर दिया।
राज्य सरकार और चिप्स ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि मामला छत्तीसगढ़ मध्यस्थम् अधिकरण अधिनियम के तहत आता है, सामान्य मध्यस्थता कानून लागू नहीं होगा। साथ ही सरकार ने यह भी तर्क दिया कि परियोजना कंसोर्टियम के जरिए की गई थी, इसलिए टाटा अकेले याचिका दायर नहीं कर सकती।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया है।