छत्तीसगढ़ में BSc नर्सिंग संकट: 53% से ज्यादा सीटें खाली, पर्सेंटाइल कटऑफ बना सबसे बड़ा कारण

रायपुर। छत्तीसगढ़ में इस वर्ष बीएससी नर्सिंग की आधे से अधिक सीटें खाली रह गई हैं। प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों में कुल 7,811 सीटें हैं, जिनमें काउंसलिंग के दोनों चरण समाप्त होने के बाद भी 4,147 सीटें रिक्त हैं। यानी लगभग 53% सीटें नहीं भर पाई हैं।

इस स्थिति से नर्सिंग कॉलेज संचालक और प्रवेश की तैयारी कर रहे छात्र–छात्राएं दोनों परेशान हैं। प्रमुख कारण बताया जा रहा है इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC) द्वारा निर्धारित उच्च पर्सेंटाइल कटऑफ—सामान्य वर्ग के लिए 50 पर्सेंटाइल और आरक्षित वर्ग के लिए 40 पर्सेंटाइल।

निजी नर्सिंग कॉलेज संघ का कहना है कि छत्तीसगढ़ जैसे आदिवासी बहुल राज्य में इतने पर्सेंटाइल लाना बड़ी संख्या में छात्रों के लिए चुनौतीपूर्ण है। हर वर्ष पहले पर्सेंटाइल ऊँचा होने के कारण सीटें खाली रह जाती हैं और बाद में INC तथा राज्य सरकार पर्सेंटाइल में छूट देकर सीटों को भरती हैं। इसी प्रक्रिया के चलते अब भी राहत की उम्मीद जताई जा रही है।

संघ पदाधिकारियों के अनुसार इस बार प्रवेश प्रक्रिया दिवाली के दिन शुरू होने के कारण भी बड़े पैमाने पर छात्र आवेदन और काउंसलिंग में शामिल नहीं हो पाए। कई छात्र ऐसे हैं जिन्होंने 12वीं में सामान्य वर्ग के लिए 45% और आरक्षित वर्ग के लिए 40% अंक लाकर मूल पात्रता तो पूरी कर ली, परंतु पर्सेंटाइल कटऑफ के कारण वे प्रवेश से वंचित रह गए।

अब सभी की निगाहें INC के अगले निर्णय पर टिकी हैं। यदि पर्सेंटाइल में छूट मिलती है, तो हजारों छात्र-छात्राओं को मौका मिलेगा और नर्सिंग कॉलेजों की अधिकांश सीटें भर सकेंगी।

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