छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कोल लेवी घोटाले (Coal Levy Scam) में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की चार्जशीट से एक बड़ा खुलासा हुआ है। जाँच एजेंसी का दावा है कि कोयला परिवहन पर अवैध लेवी वसूलने का पूरा सिंडिकेट मुख्यमंत्री निवास (CM House) से संचालित हो रहा था। इस घोटाले के तहत अब तक ₹253 करोड़ की अवैध वसूली की बात सामने आई है।
सौम्या चौरसिया और जयचंद की भूमिका
जाँच में यह तथ्य सामने आया है कि इस सिंडिकेट का मुख्य केंद्र पूर्व उप सचिव सौम्या चौरसिया थीं। ED के मुताबिक, सौम्या चौरसिया के इशारे पर ही पूरा नेटवर्क काम करता था।
• फाइलों पर हस्ताक्षर: चार्जशीट में दावा किया गया है कि सौम्या चौरसिया के कहने पर जयचंद नाम का व्यक्ति फाइलों को मुख्यमंत्री तक पहुँचाता था और उन पर हस्ताक्षर करवाता था।
• सिस्टमेटिक वसूली: कोयला खदानों से निकलने वाले ट्रकों से प्रति टन के हिसाब से अवैध वसूली की जाती थी, जिसे ‘लेवी’ का नाम दिया गया था।
सत्ता के रसूख का दुरुपयोग
इस खुलासे ने छत्तीसगढ़ की तत्कालीन प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ED का कहना है कि सिंडिकेट ने न केवल कोयला व्यापारियों को डराया-धमकाया, बल्कि सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल अपनी तिजोरियाँ भरने के लिए किया। इस मामले में कई IAS अधिकारियों और बड़े कारोबारियों की संलिप्तता की जाँच भी जारी है।

