रायपुर: छत्तीसगढ़ में 14 नवंबर से शुरू हुई समर्थन मूल्य (3100 रुपये प्रति क्विंटल) पर धान खरीदी प्रक्रिया अव्यवस्था का शिकार हो गई। ‘टोकन तुंहर हाथ’ मोबाइल ऐप सर्वर ठप होने और कंप्यूटर ऑपरेटर्स की हड़ताल से पंजीयन व टोकन कटिंग रुक गई। किसान केंद्रों पर मायूस लौट रहे, धान बेचने में देरी। राज्य के 96 खरीदी केंद्रों (जैसे राजनांदगांव, धमतरी, बलौदाबाजार) में 10,627 किसानों ने बिक्री की, लेकिन लाखों प्रभावित।
समस्या का केंद्र: ऐप से घर बैठे टोकन काटने की सुविधा दी गई—लघु किसान 2, बड़े 3 टोकन। लेकिन तकनीकी खराबी से ऐप क्रैश, सर्वर स्लो। धमतरी में कांग्रेस ने कलेक्टर को ज्ञापन दिया: “ऑफलाइन टोकन चालू करें।” बलौदाबाजार में च्वाइस सेंटर्स पर लाइनें, लेकिन सर्वर डाउन से टोकन नहीं कटे। राजनांदगांव में 5 दिसंबर तक टोकन खत्म, ऑफलाइन बंद।
हड़ताल का असर: कंप्यूटर ऑपरेटर्स (CSC सेंटर्स) ने वेतन वृद्धि, नियमितीकरण की मांग पर हड़ताल की। इससे पंजीयन (e-Krishi) अटका। राइस मिलर्स ने बकाया भुगतान न होने पर कस्टम मिलिंग रोकी, बारदाने की कमी। कर्मचारियों की हड़ताल से हमाल अनुबंध, बिजली व्यवस्था प्रभावित।
किसानों की परेशानियां: सतनाम साहू (धमतरी) बोले, “धान गोदाम में सड़ रहा, टोकन नहीं कट रहा।” अव्यवस्था से 3-7 दिन देरी। सरकार ने ऑफलाइन टोकन 25 नवंबर से चालू करने का ऐलान किया, लेकिन हड़ताल बरकरार।
सरकारी कदम: कृषि मंत्री बोले, “तकनीकी समस्या ठीक, हड़ताल पर वार्ता। मिलर्स का पंजीयन जल्द।” NIC ने ऐप अपडेट वादा किया। पूर्व CM भूपेश बघेल ने तंज: “डिजिटल भारत का मजाक।” 1 दिसंबर तक खरीदी, लेकिन किसान चिंतित।