बिजली विभाग गोदाम अग्निकांड: 50 करोड़ का नुकसान, सवालों का ढेर

Raipur : रायपुर में हुए बिजली विभाग के गोदाम अग्निकांड ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया था। इस हादसे में करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति जलकर खाक हो गई थी। एक महीने बाद सामने आई जांच रिपोर्ट में कई खामियां हैं और कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब नहीं मिल पाए हैं।

रिपोर्ट में क्या खामियां हैं?

  • आग लगने का कारण स्पष्ट नहीं: रिपोर्ट आग लगने के कारण का स्पष्ट उल्लेख नहीं करती है, जो कि सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।
  • नुकसान का आकलन विवादास्पद: रिपोर्ट में 50 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जलने का दावा किया गया है, लेकिन इस भारी नुकसान का समर्थन करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं पेश किए गए हैं।
  • जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं: एक महीने बाद भी, किसी भी अधिकारी को निलंबित नहीं किया गया है और न ही उनसे जवाबदेही तय की गई है।
  • मुख्यमंत्री के निर्देशों की अवहेलना: मुख्यमंत्री ने स्पष्ट रूप से निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए थे, जिनका पालन नहीं किया गया है।

अनसुलझे सवाल:

  • आग कैसे लगी? क्या यह जानबूझकर लगाई गई थी, चोरी या भ्रष्टाचार को छिपाने का प्रयास था, या फिर लापरवाही का नतीजा था?
  • क्या रिपोर्ट में हेरफेर किया गया है? 50 करोड़ रुपये के नुकसान का दावा अत्यधिक लगता है, और इसकी पुष्टि करने के लिए कोई सबूत नहीं है।
  • कौन जिम्मेदार है? किन अधिकारियों की लापरवाही या मिलीभगत के कारण यह हादसा हुआ?
  • क्या उच्च अधिकारी भी संलिप्त हैं?
  • अग्निशमन विभाग की भूमिका क्या थी? क्या उन्होंने समय पर प्रतिक्रिया दी और आग बुझाने के लिए पर्याप्त प्रयास किए?
  • गायब अधिकारी कहां हैं? जिन अधिकारियों को इस गोदाम की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, वे जांच के दौरान अनुपस्थित क्यों हैं?

सूत्रों का दावा है कि गोदाम में लंबे समय से बिजली उपकरणों की चोरी हो रही थी। आग लगने के पीछे चोरी और भ्रष्टाचार को छिपाने का मकसद हो सकता है। कांग्रेस ने घटना की निष्पक्ष जांच और रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है।

यह देखना बाकी है कि क्या सरकार इन सवालों का जवाब देगी और इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई करेगी।

यह भी ध्यान रखें:

  • यह रिपोर्ट विभिन्न मीडिया स्रोतों और जांच रिपोर्टों से मिली जानकारी पर आधारित है।
  • आग लगने का कारण और जिम्मेदार लोगों का पता लगाने के लिए अभी भी जांच जारी है।
  • इस मामले में किसी भी आरोपी को सिद्ध नहीं माना जा सकता जब तक कि उसे कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से दोषी नहीं ठहराया जाता है।

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