छत्तीसगढ़ में खाद (उर्वरक) की कालाबाजारी और अवैध भंडारण को लेकर केंद्र सरकार ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं। लोकसभा में दी गई जानकारी के अनुसार, खाद की कालाबाजारी के मामले में छत्तीसगढ़ पूरे देश में 5वें स्थान पर है। केंद्र और राज्य सरकार की सख्ती के बावजूद, बिचौलिए और कुछ व्यापारी किसानों के हक की खाद पर डाका डाल रहे हैं।
8 महीने की कार्रवाई का लेखा-जोखा
पिछले 8 महीनों के दौरान कृषि विभाग और प्रशासन ने राज्य भर में सघन छापेमारी की है। लोकसभा में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में हुई कार्रवाई कुछ इस प्रकार है:
• नोटिस: नियमों के उल्लंघन पर 294 विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।
• लाइसेंस रद्द: गंभीर अनियमितता पाए जाने पर 13 दुकानों के लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द कर दिए गए हैं।
• FIR दर्ज: कालाबाजारी और अवैध मुनाफ़ाखोरी के आरोप में 4 व्यापारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है।
• निरीक्षण: राज्य में उर्वरक निरीक्षकों द्वारा हज़ारों केंद्रों का औचक निरीक्षण किया गया है।
किसानों को आर्थिक चोट
रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में विशेष रूप से DAP और यूरिया की कृत्रिम किल्लत पैदा कर उन्हें ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। जहां सरकारी दर कम है, वहीं खुले बाजार में कालाबाजारी के चलते किसानों को ₹1350 का DAP ₹1700 से ₹1800 तक में खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है। इससे खेती की लागत 50% से अधिक बढ़ गई है, जिससे छोटे किसानों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
प्रशासन ने अब सभी उर्वरक विक्रेताओं के लिए POS मशीन के जरिए ही बिक्री करना अनिवार्य कर दिया है ताकि हर बोरी का हिसाब पारदर्शी रहे।

