छत्तीसगढ़ गठन: अजीत जोगी के सीएम बनने की 8 अनसुनी कहानियां – शपथ में रेणु को रोका, दिग्विजय से भिड़े अजीत, सोनिया की क्लास ने बदला सब

रायपुर, 30 अक्टूबर 2025: 1 नवंबर 2000 को मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ राज्य बना। इसकी नींव में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की दृष्टि थी, लेकिन पहले मुख्यमंत्री अजीत जोगी का चयन राजनीतिक ड्रामे से भरा रहा। आईएएस से राजनीति में आए जोगी को विद्याचरण शुक्ल, मोतीलाल वोरा जैसे दिग्गजों को पछाड़कर कुर्सी मिली। यहां 8 दिलचस्प कहानियां:

1.  राजीव का फोन, कलेक्टरी छोड़ी: 1985 में इंदौर कलेक्टर जोगी को पीएमओ से फोन आया। राजीव गांधी ने राजनीति में आने को कहा। जोगी ने 1986 में आईएएस छोड़ दिया। दिग्विजय सिंह ने आधी रात उनके घर जाकर नामांकन के लिए मनाया।

2.  दिग्विजय की भविष्यवाणी: 1986 में दिग्विजय ने कहा, “जोगी पहले आदिवासी सीएम बनेगा।” 14 साल बाद 2000 में यह सच हुआ। दिग्विजय ने जोगी को कांग्रेस जॉइन कराया, लेकिन बाद में दुश्मनी हो गई।

3.  सोनिया की क्लास, दुश्मनी भुलाई: जोगी और दिग्विजय के बीच तनाव चरम पर था। सोनिया गांधी ने दिग्विजय को बुलाकर फटकार लगाई – “दुश्मनी भूलो, जिम्मेदारी निभाओ।” दिग्विजय ने जोगी को सीएम बनाने में मदद की।

4.  दिग्विजय का कुर्ता फटा: जोगी के चयन से विद्याचरण शुक्ल नाराज। दिग्विजय मनाने गए तो समर्थकों ने उनका कुर्ता फाड़ दिया। यह घटना कांग्रेस में हंगामा मचा गई।

5.  शपथ-ग्रहण में रेणु को रोका: 31 अक्टूबर 2000, आधी रात का शपथ समारोह। जोगी परिवार जैसे ही पहुंचा, सुरक्षा ने रेणु जोगी को रोक लिया। हड़बड़ी में फटे कुर्ते में जोगी ने शपथ ली। पहली रात सीएम हाउस में बरसात से छत टपकती रही।

6.  अजीत-दिग्विजय भिड़ंत: 1993 में दिग्विजय सीएम बने तो जोगी ने चुनौती दी। जोगी ने कहा, “मैं आदिवासी नेता हूं।” दिग्विजय ने जवाब दिया, “मैंने ही तुम्हें लाया है।” यह दुश्मनी 2000 तक चली।

7.  रेणु की सलाह, चुनावी हार: 2003 चुनाव से पहले जोगी हार गए थे। रेणु जोगी और दिग्विजय की सलाह पर नामांकन भरा। लेकिन सोनिया ने कई दिग्गजों को दरकिनार कर जोगी को चुना। रेणु ने कहा, “हमें आश्चर्य हुआ, विधायक भी नहीं थे।”

8.  गांधी परिवार का भरोसा: जोगी का चयन सोनिया की पहली बड़ी नियुक्ति थी। राजीव से नजदीकी और आदिवासी छवि ने मदद की। शुक्ल-वोरा जैसे दावेदारों को पीछे छोड़ा।

ये कहानियां छत्तीसगढ़ की राजनीति की नींव हैं। जोगी का दौर विवादों भरा रहा, लेकिन राज्य गठन की ये घटनाएं आज भी प्रेरणा देती हैं।

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