रायपुर। शासकीय मुद्रणालय की नई निविदा की कठोर पात्रता शर्तों को लेकर छत्तीसगढ़ के स्थानीय मुद्रकों में नाराजगी है। मुद्रकों का आरोप है कि 5 करोड़ रुपये का न्यूनतम वार्षिक टर्नओवर, वेब ऑफसेट मशीन और 20 हजार वर्गफुट अधोसंरचना जैसी शर्तों के कारण छोटे और स्थानीय मुद्रण संस्थानों के लिए निविदा में शामिल होना मुश्किल हो गया है।
मुद्रकों ने मांग की है कि निविदा की शर्तों को छत्तीसगढ़ संवाद की तर्ज पर सरल और व्यावहारिक बनाया जाए, ताकि स्थानीय इकाइयों को समान अवसर मिल सके। उन्होंने पिछले पांच वर्षों में हुए करीब 400 करोड़ रुपये के मुद्रण कार्यों, एल-1 दरों और कार्य आवंटन का स्वतंत्र ऑडिट कराने की भी मांग की है।
मुद्रकों ने आरोप लगाया कि शासकीय मुद्रणालय के स्तर पर शासन के पूर्व निर्देशों की भी अनदेखी की जा रही है। उनका कहना है कि मामला स्थानीय उद्योगों को अवसर देने के साथ सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा से जुड़ा है।

