छत्तीसगढ़ में ग्रामीण भूमि मूल्यांकन नियम बदले, वर्ग मीटर दर खत्म

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के निर्देश पर वित्त एवं वाणिज्य कर मंत्री ओपी चौधरी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने भूमि मूल्यांकन व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। पेरी-अर्बन ग्रामों और ग्रामीण क्षेत्रों में लागू वर्ग मीटर दर को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। अब इन क्षेत्रों में भूमि का मूल्यांकन केवल हेक्टेयर दर के आधार पर किया जाएगा।

इस निर्णय से भूमि मूल्यांकन में व्याप्त असमानता खत्म होगी और किसानों, भू-धारकों व आम नागरिकों को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा। पहले कम क्षेत्रफल वाली जमीन पर अधिक और बड़े क्षेत्रफल पर कम मूल्यांकन की विसंगति थी, जिसे अब दूर कर दिया गया है। नई व्यवस्था से भूमि अधिग्रहण मामलों में भी वास्तविक क्षेत्रफल के अनुसार न्यायसंगत मुआवजा मिलेगा।

वर्ग मीटर दर हटने से स्टाम्प और पंजीयन शुल्क में भी कमी आई है, जिससे रजिस्ट्री की लागत घटेगी। इससे ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों में भूमि खरीदना आसान होगा और रियल एस्टेट व विकास कार्यों को भी बढ़ावा मिलेगा। राज्य सरकार का यह फैसला जनहित में एक महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला कदम माना जा रहा है।

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