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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: अविवाहित बेटी का भरण-पोषण और शादी का खर्च उठाना पिता का पवित्र कर्तव्य

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि अविवाहित बेटी के भरण-पोषण, शिक्षा और शादी का खर्च उठाना पिता की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है। जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस संजय कुमार जायसवाल की बेंच ने शिक्षक पिता की अपील खारिज कर दी और फैमिली कोर्ट के निर्णय को सही ठहराया।

फैमिली कोर्ट ने पिता को हर माह 2500 रुपये भरण-पोषण तथा शादी के लिए 5 लाख रुपये देने का निर्देश दिया था। युवती ने शिकायत की थी कि मां की मृत्यु के बाद पिता ने दूसरी शादी कर ली और अब उसकी देखभाल नहीं करते, जबकि पिता की मासिक आय 44,642 रुपये है।

हाईकोर्ट ने कहा कि अविवाहित बेटी भरण-पोषण अधिनियम में संरक्षित है, और शादी का खर्च भी उसमें शामिल है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पिता इस जिम्मेदारी से बच नहीं सकता। सुनवाई के दौरान पिता ने हाईकोर्ट को आश्वासन दिया कि वह आदेश का पालन करेंगे।

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