बिलासपुर। हाईकोर्ट ने ग्रामीण अभियांत्रिक सेवा में नियुक्त 66 उप अभियंताओं (सिविल) की नियुक्तियों को अवैध बताते हुए रद्द कर दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया तय नियमों के खिलाफ की गई थी।
याचिकाकर्ता रवि तिवारी की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पाया कि कई चयनित अभ्यर्थियों के पास कट-ऑफ तिथि तक जरूरी शैक्षणिक योग्यता नहीं थी। इसके अलावा 275 पदों के विज्ञापन के बावजूद उससे अधिक नियुक्तियां की गईं।
कोर्ट ने यह दलील भी खारिज कर दी कि नियुक्त कर्मचारी करीब 14 साल से सेवा दे रहे हैं। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि लंबी सेवा अवैध नियुक्ति को वैध नहीं बना सकती। इसके बाद कोर्ट ने क्वो वारंटो जारी करते हुए 66 उप अभियंताओं की नियुक्तियां निरस्त कर दीं।