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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: श्री सीमेंट को रेलवे कनेक्टिविटी देने भूमि अधिग्रहण पर किसानों की याचिकाएं खारिज

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में श्री सीमेंट को रेलवे कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के लिए किए जा रहे भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली किसानों की याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता अधिग्रहण प्रक्रिया में ऐसी कोई कानूनी खामी या अनियमितता साबित नहीं कर पाए, जिसके आधार पर न्यायालय हस्तक्षेप करे।

हथबंध से खपराडीह तक प्रस्तावित है रेलवे लाइन

मामले के अनुसार, रेल मंत्रालय ने 16 जून 2025 को हथबंध रेलवे स्टेशन के पूर्वी केबिन से खपराडीह गांव तक रेलवे ट्रैक बनाने के लिए भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी की थी। इस परियोजना का उद्देश्य गति शक्ति मल्टी-मॉडल कार्गो टर्मिनल को रेलवे कनेक्टिविटी प्रदान करना है।

रवेली सहित आसपास के गांवों के किसानों ने अधिग्रहण पर आपत्ति जताते हुए रेलवे अधिनियम की धारा 20-डी के तहत याचिकाएं दायर की थीं।

किसानों ने उठाए थे ये सवाल

किसानों का तर्क था कि प्रस्तावित रेलवे लाइन से निजी कंपनी श्री सीमेंट को लाभ होगा, जबकि क्षेत्र में पहले से रेलवे की आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने अल्ट्राटेक सीमेंट के लिए बने रेलवे ट्रैक और वैकल्पिक मार्ग की संभावना का भी उल्लेख किया।

किसानों ने आशंका जताई थी कि नई रेल लाइन उनके सिंचित खेतों से होकर गुजरेगी, जिससे कृषि भूमि और उत्पादन प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने अधिकारियों पर उनकी आपत्तियों पर उचित विचार नहीं करने का आरोप भी लगाया था।

हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की याचिकाएं?

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि किसानों को सुनवाई का अवसर दिया गया था और उनकी आपत्तियों पर विचार करने के बाद निर्णय लिया गया। अदालत के मुताबिक, केवल इस आधार पर कि परियोजना से किसी निजी कंपनी को भी लाभ होगा, उसका सार्वजनिक उद्देश्य समाप्त नहीं हो जाता।

कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी है और रेलवे अधिनियम की धारा 20-ई के तहत घोषणा जारी हो चुकी है। ऐसे में पूरी प्रक्रिया रद्द करने से रेलवे की बुनियादी ढांचा परियोजना प्रभावित हो सकती है।

अदालत ने सभी संबंधित याचिकाएं खारिज कर दीं। हालांकि, फैसले में स्पष्ट किया गया कि किसान मुआवजे के निर्धारण, मुआवजा बढ़ाने या भुगतान सहित रेलवे अधिनियम के तहत उपलब्ध अन्य वैधानिक उपाय अपना सकते हैं।

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