GST Section 74 पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का अहम फैसला: शो-कॉज नोटिस में ‘धोखाधड़ी’ लिखना काफी नहीं, विभाग को बताने होंगे ठोस तथ्य

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने वस्तु और सेवा कर (GST) अधिनियम के तहत कार्रवाई करने वाले अधिकारियों को एक बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल ‘धोखाधड़ी’ (Fraud) या ‘दुरुभिसंधि’ जैसे बड़े शब्दों का इस्तेमाल करके टैक्सपेयर्स को जीएसटी अधिनियम की धारा 74 (Section 74) के तहत नोटिस जारी नहीं किया जा सकता। इसके लिए विभाग को नोटिस में धोखाधड़ी साबित करने वाले ठोस तथ्य, दस्तावेज और आधार स्पष्ट रूप से बताने होंगे।

क्या है पूरा मामला और अदालत की टिप्पणी?

यह महत्वपूर्ण फैसला जस्टिस गौतम भादुड़ी और जस्टिस दीपक कुमार तिवारी की खंडपीठ द्वारा एक मामले की सुनवाई के दौरान दिया गया। अदालत ने कहा कि धारा 74 का उपयोग केवल तभी किया जा सकता है जब जानबूझकर टैक्स चोरी करने या धोखाधड़ी का स्पष्ट मामला बनता हो। महज़ तकनीकी या सामान्य चूक के मामलों में इस धारा के तहत नोटिस भेजना कानून की मंशा के खिलाफ है। अदालत ने स्पष्ट किया कि नोटिस जारी करने वाले प्राधिकारी को यह बताना होगा कि आखिर किस आधार पर करदाता पर धोखाधड़ी या गलत बयानी का आरोप लगाया जा रहा है।

टैक्सपेयर्स को मिलेगी बड़ी राहत

हाईकोर्ट के इस फैसले से छत्तीसगढ़ समेत देशभर के कारोबारियों और टैक्सपेयर्स को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अक्सर देखा जाता है कि जीएसटी विभाग मामूली अंतर या प्रक्रियागत गलतियों पर भी सीधे धारा 74 के तहत भारी-भरकम पेनल्टी और टैक्स डिमांड के नोटिस थमा देता है, जिसमें धोखाधड़ी का आरोप लगाया जाता है। अब इस फैसले के बाद:

  • मनमाने नोटिसों पर लगाम: विभाग अब बिना पुख्ता सबूतों के धारा 74 के तहत मनमाने तरीके से कार्रवाई नहीं कर सकेगा।
  • पारदर्शिता बढ़ेगी: अधिकारियों को करदाता के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों को कानूनी और तथ्यात्मक रूप से सही साबित करना होगा।

यह फैसला करदाताओं के कानूनी अधिकारों की रक्षा करने और टैक्स प्रशासन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

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