बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने नेशनल हाईवे चौड़ीकरण के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे से जुड़ी आर्बिट्रेशन अपील को 221 दिन की देरी के चलते खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति बिभु दत्ता गुरु की एकलपीठ ने साफ कहा कि धनाभाव या कानूनी जानकारी की कमी जैसे सामान्य कारणों पर इतनी लंबी देरी माफ नहीं की जा सकती।
मामला जांजगीर-चांपा जिले की जमीन अधिग्रहण से जुड़ा था। पहले मध्यस्थ ने मुआवजे के पुनर्मूल्यांकन का निर्देश दिया था, लेकिन जिला न्यायालय ने 2019 में वह आदेश निरस्त कर दिया। इसके बाद हाईकोर्ट में दायर अपील तय समय-सीमा से काफी देर से पहुंची।
हाईकोर्ट ने कहा कि देरी माफी कोई अधिकार नहीं, बल्कि न्यायालय के विवेक पर निर्भर करती है। 221 दिन की देरी को अत्यधिक मानते हुए देरी माफी आवेदन और साथ ही पूरी अपील खारिज कर दी गई।