बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सेंट्रल जेल बिलासपुर में कार्यरत महिला वार्डर को चाइल्ड केयर लीव देने से इनकार किए जाने के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि यदि कोई कर्मचारी छत्तीसगढ़ सिविल सर्विसेज (लीव) रूल्स, 2010 के तहत पात्रता पूरी करता है, तो केवल स्टाफ की कमी या प्रशासनिक कारणों से चाइल्ड केयर लीव से वंचित नहीं किया जा सकता।
मामले में जेल वार्डर मंदा तिवारी ने जुड़वां बच्चों की देखभाल के लिए 60 दिन की अतिरिक्त चाइल्ड केयर लीव मांगी थी, जिसे जेल प्रशासन ने स्टाफ की कमी का हवाला देकर अस्वीकार कर दिया था। इस पर सुनवाई करते हुए जस्टिस विभु दत्त गुरु की एकलपीठ ने आदेश दिया कि प्रशासनिक कठिनाइयां कर्मचारी के वैधानिक अधिकारों पर हावी नहीं हो सकतीं और याचिकाकर्ता को चाइल्ड केयर लीव प्रदान की जाए।
सुनवाई के दौरान जेल प्रशासन ने बताया कि बिलासपुर सेंट्रल जेल में वार्डर के 106 स्वीकृत पदों में 24 रिक्त हैं और केवल 13 महिला वार्डर कार्यरत हैं। हालांकि, हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्टाफ की कमी का समाधान करना नियोक्ता की जिम्मेदारी है, न कि कर्मचारी के कानूनी अधिकारों को सीमित करने का आधार।

