बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि समान आरोपों और समान साक्ष्यों पर आधारित आपराधिक मुकदमा और विभागीय जांच एक साथ नहीं चलाई जा सकती। अदालत ने कोरबा जिले में पदस्थ सब इंस्पेक्टर एस.के. कोशरिया के खिलाफ चल रही विभागीय जांच पर अंतरिम रोक लगा दी है।
मामला थाना पसान में पदस्थ सब इंस्पेक्टर एस.के. कोशरिया से जुड़ा है। उनके खिलाफ कटघोरा थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 332 और 74 के तहत मामला दर्ज किया गया था। इसके करीब दो महीने बाद पुलिस अधीक्षक, कोरबा ने उन्हीं आरोपों के आधार पर विभागीय जांच शुरू कर आरोप पत्र जारी किया।
इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए एस.के. कोशरिया ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि जब आपराधिक मामला न्यायालय में विचाराधीन हो और विभागीय जांच भी उन्हीं आरोपों व समान साक्ष्यों पर आधारित हो, तो दोनों कार्यवाहियां साथ चलाना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत है और इससे निष्पक्ष बचाव का अधिकार प्रभावित हो सकता है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के एम. पॉल एंथोनी बनाम भारत गोल्ड माइंस लिमिटेड सहित अन्य फैसलों का हवाला दिया गया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता के पक्ष को स्वीकार करते हुए विभागीय जांच पर अगली सुनवाई तक अंतरिम रोक लगा दी।
अदालत का यह फैसला उन मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ समान आरोपों के आधार पर आपराधिक मुकदमा और विभागीय जांच एक साथ संचालित की जा रही हो।

