रायपुर। भारतमाला परियोजना के अंतर्गत रायपुर-विशाखापट्नम इकॉनामिक कॉरिडोर में सामने आए करीब 325 करोड़ रुपए के मुआवजा घोटाले के बाद अब दुर्ग और राजनांदगांव जिले में भी मुआवजा वितरण प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। शासन ने इन जिलों में अधिग्रहित भूमि के मुआवजे में संभावित अनियमितताओं को लेकर नए सिरे से दावा-आपत्तियां व शिकायतें मंगाई हैं।
वेबसाइट पर जारी की गई है अधिग्रहित भूमि की सूची
दुर्ग संभाग के आयुक्त कार्यालय के अनुसार, दुर्ग जिले के दुर्ग और पाटन अनुविभागों के तहत और राजनांदगांव जिले के राजनांदगांव अनुविभाग के अंतर्गत जिन जमीनों का अधिग्रहण किया गया है, उनकी सूची संबंधित जिलों के कलेक्टर कार्यालय की वेबसाइट पर प्रकाशित कर दी गई है।
यदि किसी व्यक्ति को इस प्रक्रिया में आपत्ति, दावा या कोई शिकायत दर्ज करानी है, तो 15 दिनों के भीतर संभागायुक्त दुर्ग कार्यालय अथवा संबंधित कलेक्टर कार्यालय को आवेदन प्रस्तुत किया जा सकता है।
किन क्षेत्रों में हुआ है भू-अर्जन?
भारतमाला परियोजना के अंतर्गत दुर्ग-रायपुर सिक्स लेन बायपास रोड निर्माण के लिए निम्न तहसीलों के गांवों में भूमि अधिग्रहण किया गया है:
- राजनांदगांव तहसील – 2 गांव
- दुर्ग तहसील – 12 गांव
- पाटन तहसील – 13 गांव
- अभनपुर तहसील – 16 गांव
- आरंग तहसील – 8 गांव
कई किसानों ने आरोप लगाया है कि मुआवजा निर्धारण और भू-अर्जन की प्रक्रिया में भारी गड़बड़ियां और नियमों की अनदेखी हुई है। किसानों का कहना है कि उन्हें वाजिब मुआवजा नहीं मिला, और कुछ जगहों पर गलत व्यक्तियों को राशि दी गई।
प्रदेश भर में मुआवजा वितरण की जांच जारी
गौरतलब है कि इस परियोजना के रायपुर-विशाखापट्नम सेक्शन में 325 करोड़ रुपए का मुआवजा घोटाला उजागर होने के बाद शासन ने प्रदेशभर में भू-अर्जन और मुआवजा वितरण की जांच के आदेश दिए थे। सभी संभागायुक्तों को रिपोर्ट सौंपने और अधिग्रहित भूमि की सूची वेबसाइट पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए थे।
इस मामले की जांच अब ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा) और एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) को सौंपी गई है।
इन बिंदुओं पर हो रही है जांच
भारतमाला परियोजना के अंतर्गत जिन जिलों से सड़क गुजरेगी उनमें रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव, बिलासपुर, कांकेर, धमतरी, कोरबा, जशपुर, जांजगीर-चांपा आदि शामिल हैं। इन जिलों में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया की जांच पांच प्रमुख बिंदुओं पर हो रही है, जैसे:
- मुआवजा वितरण की प्रक्रिया की पारदर्शिता
- वास्तविक जमीन मालिक को राशि मिली या नहीं
- फर्जी कागजातों के आधार पर भुगतान हुआ या नहीं
- नियमानुसार भू-अर्जन का मूल्यांकन
- भूमि रिकार्ड में छेड़छाड़ या हेराफेरी

