रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ कही जाने वाली मितानिन कार्यकर्ताओं ने एक बार फिर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। हजारों की संख्या में मितानिनें नवा रायपुर के तूता धरना स्थल पर सोमवार को एक दिवसीय सांकेतिक धरना-प्रदर्शन में शामिल हुईं। कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर तुरंत निर्णय नहीं लिया, तो वे 7 अगस्त 2025 से अनिश्चितकालीन काम बंद और कलम बंद आंदोलन शुरू करेंगी।
चुनावी वादों को याद दिलाया
स्वास्थ्य मितानिन संघ की पदाधिकारियों ने कहा कि 2023 विधानसभा चुनाव के दौरान सरकार ने घोषणा पत्र में मितानिन, मितानिन प्रशिक्षक, हेल्प डेस्क फैसिलिटेटर और ब्लॉक कोऑर्डिनेटर को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत शामिल करने का वादा किया था। लेकिन वादा निभाने के बजाय कार्यक्रम संचालन की जिम्मेदारी एक दिल्ली की एनजीओ को सौंप दी गई है। संघ का कहना है कि यह निर्णय मितानिनों के साथ सीधा विश्वासघात है।
13 महीनों से समय पर नहीं मिल रहा वेतन
संघ ने आरोप लगाया कि मितानिनों को पिछले 13 महीनों से समय पर वेतन/मानदेय नहीं मिल रहा। कई बार 3-4 महीने की देरी से भुगतान किया जा रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है। दिसंबर 2024 में भी उन्होंने अनिश्चितकालीन हड़ताल की थी, जिसके बाद शासन ने आश्वासन दिया था। मगर आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
7 अगस्त से आर-पार की लड़ाई
संघ ने साफ कर दिया कि अब मितानिनें किसी एनजीओ के अधीन काम नहीं करेंगी। उन्होंने कहा कि ठेका प्रथा खत्म की जाए और मितानिनों को सीधे NHM के अंतर्गत स्थायी किया जाए। संघ ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा और इसे धीरे-धीरे और तेज किया जाएगा।
स्वास्थ्य मितानिन संघ की प्रमुख मांगें
- NHM में संविलियन: चुनावी घोषणा पत्र में किए गए वादे के अनुसार मितानिन, मितानिन प्रशिक्षक, हेल्प डेस्क फेसिलिटेटर और ब्लॉक कोऑर्डिनेटर को NHM में शामिल किया जाए।
- 50% वेतन वृद्धि: चुनावी वादे के मुताबिक वेतन/क्षतिपूर्ति में कम से कम 50% की बढ़ोतरी की जाए।
- ठेका प्रथा समाप्त: मितानिन कार्यक्रम में एनजीओ आधारित कार्यप्रणाली को बंद कर स्थायी व्यवस्था की जाए।
“यह सिर्फ वेतन का सवाल नहीं”
एक मितानिन कार्यकर्ता ने कहा, “यह आंदोलन केवल हमारे अधिकारों के लिए नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए है। हमें स्थायित्व, सम्मान और समय पर वेतन चाहिए। अगर सरकार वादे नहीं निभाएगी, तो हम आंदोलन को और तेज करेंगे।”

