रायपुर, 22 नवंबर 2025: छत्तीसगढ़ सरकार के लोक शिक्षण संचालनालय ने स्कूल प्राचार्यों और प्रधान पाठकों को आवारा कुत्तों की निगरानी करने का निर्देश जारी किया है। आदेश के मुताबिक, स्कूल परिसर में घूमने वाले स्ट्रे डॉग्स पर नजर रखनी होगी, उन्हें पकड़ने या स्थानीय एनिमल वेलफेयर कमिटी को सूचित करना होगा। इस फैसले से शिक्षक समुदाय में रोष फैल गया है। शिक्षक संगठनों ने इसे ‘अनुचित बोझ’ बताते हुए विरोध जताया।
छत्तीसगढ़ प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष ओमप्रकाश कोशले ने कहा, “हमारी मुख्य जिम्मेदारी बच्चों को पढ़ाना है, न कि कुत्तों को भगाना। क्या अब स्कूल में डॉग कैचर की ड्यूटी भी देंगे? यह शिक्षा व्यवस्था का अपमान है।” संघ ने 25 नवंबर को राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है।
कांग्रेस ने भी सरकार पर निशाना साधा। प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता रविकांत शर्मा बोले, “बस यही दिन देखना बाकी था। भाजपा सरकार ने शिक्षकों को कुत्तों की रखवाली सौंप दी। शिक्षा पर ध्यान देने के बजाय ऐसी बेतुकी योजनाएं चला रही है। हम सदन में इसकी निंदा करेंगे।” विपक्ष ने मांग की कि यह जिम्मेदारी मितानिन, रोजगार सहायकों या कोटवारों को सौंपी जाए।
आदेश का आधार: राज्य में बढ़ते रेबीज मामलों को रोकने के लिए पशु कल्याण विभाग की सलाह। लेकिन शिक्षकों का कहना है कि स्कूलों में स्टाफ की कमी पहले से है, अतिरिक्त ड्यूटी असंभव। संचालनालय ने स्पष्ट किया कि यह वैकल्पिक है, लेकिन विरोध तेज हो रहा है। मामला राजनीतिक रंग ले चुका, भाजपा ने इसे ‘समाज सेवा’ बताया।

