रायपुर | 03 सितंबर 2026 | भूजल संवर्धन और जल प्रबंधन की दिशा में छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के ताजा राष्ट्रीय सर्वेक्षण व मूल्यांकन में छत्तीसगढ़ जल संरक्षण के प्रयासों में पूरे देश में अव्वल (नंबर-1) पायदान पर पहुंच गया है। सबसे खास बात यह है कि देश भर के शीर्ष 10 जिलों की सूची में अकेले छत्तीसगढ़ के पांच जिलों ने अपनी जगह बनाई है। वहीं कोरिया जिले का नवाचारी ‘5 प्रतिशत मॉडल’ पूरे देश के लिए जल संचयन की नजीर बनकर उभरा है।
राष्ट्रीय स्तर पर चमके प्रदेश के 5 जिले
जल संरक्षण के विभिन्न मानकों—जैसे भूजल पुनर्भरण, वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग), पारंपरिक जल स्रोतों के जीर्णोद्धार और सामुदायिक भागीदारी—में छत्तीसगढ़ के जिलों ने देश के अन्य राज्यों को पीछे छोड़ दिया। टॉप-10 में जगह बनाने वाले जिलों में कोरिया, कबीरधाम, सूरजपुर, धमतरी और राजनांदगांव शामिल हैं। इन जिलों में पंचायत स्तर पर चलाए गए सघन अभियानों ने गिरते भूजल स्तर को सुधारने में निर्णायक भूमिका निभाई।
कोरिया का ‘5% मॉडल’ बना मिसाल
कोरिया जिले द्वारा विकसित ‘5 प्रतिशत मॉडल’ (खेती की 5 फीसदी जमीन पर जल संरचना का निर्माण) राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। इस मॉडल के तहत किसानों को अपने कुल खेत के महज 5 प्रतिशत भूभाग पर छोटे गड्ढे या खेत-तालाब (डबरी) बनाने के लिए प्रेरित किया गया। इसका दोहरा फायदा हुआ—बरसात का पानी बहकर व्यर्थ जाने के बजाय खेतों में ही जमीन के नीचे समा गया, जिससे भूजल रिचार्ज हुआ और रबी फसलों के लिए स्थानीय स्तर पर सिंचाई का पक्का साधन तैयार हो गया।
सामुदायिक भागीदारी और मनरेगा का दिखा असर
प्रदेश की इस बड़ी कामयाबी के पीछे महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) और जनभागीदारी का अहम योगदान रहा। ग्रामीण विकास विभाग ने गांवों में हजारों की संख्या में चेकडैम, सोक पिट, कंटूर ट्रेंच और अमृत सरोवरों का निर्माण कराया। मुख्यमंत्री और जल संसाधन मंत्री ने इस उपलब्धि पर प्रदेशवासियों, किसानों और मैदानी अमले को बधाई देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की यह पहल देश के अन्य राज्यों को पर्यावरण और जल सुरक्षा के लिए नई दिशा दिखाएगी।

