रायपुर। छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण पर रोक लगाने वाले धर्म स्वतंत्रता विधेयक को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज हो गई है। गुरुवार को मंत्रालय में गठित मंत्रिमंडलीय उप-समिति की पहली बैठक हुई, जिसमें विधेयक के संवैधानिक, कानूनी और सामाजिक पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में गृह मंत्री विजय शर्मा, उपमुख्यमंत्री अरुण साव सहित कई मंत्री शामिल हुए। मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि यह विधेयक किसी एक धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि सभी धर्मों की स्वतंत्रता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाया जा रहा है। प्रलोभन, दबाव या जबरदस्ती से धर्मांतरण पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान किया जाएगा।
सरकार ने कहा कि विधेयक को पूरी तरह संवैधानिक और कानूनी रूप से मजबूत बनाया जाएगा ताकि अदालत में किसी भी चुनौती का सामना किया जा सके। उप-समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून बनाने में जल्दबाजी नहीं होगी और अन्य राज्यों के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए आगे भी बैठकें होंगी।
सूत्रों के अनुसार, धर्म स्वतंत्रता विधेयक को फरवरी–मार्च 2026 के बजट सत्र में विधानसभा में पेश किए जाने की तैयारी है। सरकार का दावा है कि यह कानून अवैध धर्मांतरण पर प्रभावी रोक लगाएगा और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने में मदद करेगा।