छत्तीसगढ़ में शिक्षा व्यवस्था को सुधारने और पठन-पाठन के स्तर को बेहतर बनाने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने एक महत्वपूर्ण और कड़ा फैसला लिया है। अब राज्य के स्कूलों में केवल प्रशासनिक काम संभालने वाले प्राचार्य (Principals) और प्रधानाध्यापक भी सीधे तौर पर कक्षाओं में जाकर विद्यार्थियों को पढ़ाएंगे। शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार, हर प्राचार्य के लिए साप्ताहिक रूप से कुछ पीरियड पढ़ाना अनिवार्य कर दिया गया है।
यह कदम सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी और घटते शैक्षणिक स्तर को पटरी पर लाने के लिए उठाया गया है। कई बार ऐसा देखा गया है कि प्रशासनिक कार्यों और कागजी औपचारिकताओं में व्यस्त रहने के कारण स्कूल प्रमुख शिक्षण कार्य से पूरी तरह दूर हो जाते हैं, जिसका असर सीधा बच्चों की पढ़ाई पर पड़ता है। विभाग का मानना है कि अनुभवी प्राचार्यों के सीधे शिक्षण कार्य से जुड़ने से न केवल छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी, बल्कि स्कूलों में अनुशासन और शैक्षणिक माहौल में भी सकारात्मक सुधार आएगा। जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) को इस नियम का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं।

