जंगलों में छिपी थी मौत की फैक्ट्री
सुकमा। छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के घने जंगलों में सुरक्षा बलों ने एक नक्सली हथियार फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है।
यह फैक्ट्री नक्सलियों द्वारा स्थानीय संसाधनों से हथियार और बम बनाने के लिए तैयार की गई थी, जहाँ से बड़ी मात्रा में विस्फोटक सामग्री, बारूद और अधूरे हथियार बरामद किए गए हैं।
यह ऑपरेशन राज्य पुलिस, जिला रिज़र्व गार्ड (DRG) और CRPF की संयुक्त कार्रवाई में सफल हुआ। अधिकारियों के मुताबिक, यह फैक्ट्री माओवादियों की ओर से चलाए जा रहे साउथ बस्तर नेटवर्क का अहम हिस्सा थी।
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ऑपरेशन की रूपरेखा
सूत्रों के अनुसार, खुफिया जानकारी मिलने के बाद सोमवार देर रात DRG और CRPF की संयुक्त टीम ने सुकमा के मिनपा इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया।
टीम को एक संदिग्ध स्थान पर नक्सली मौजूदगी के संकेत मिले।
जैसे ही सुरक्षाबल मौके पर पहुँचे, नक्सली भाग निकले और वहीं छिपी भूमिगत फैक्ट्री का खुलासा हुआ।
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क्या-क्या मिला फैक्ट्री से:
- असेंबल हो रहे 20 से ज़्यादा हथियार
- बड़ी मात्रा में बारूद और गोलियाँ
- IED बनाने का उपकरण
- वायरिंग और टाइम डिवाइस
- माओवादी लिटरेचर और नक्शे
पुलिस ने बताया कि इस फैक्ट्री में बने हथियारों का इस्तेमाल छत्तीसगढ़, ओडिशा और तेलंगाना बॉर्डर क्षेत्रों में होने वाली नक्सली गतिविधियों में किया जाता था।
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पुलिस अधिकारियों का बयान:
सुकमा एसपी कुंवर सिंह धुर्वे ने बताया —
“यह अब तक का सबसे बड़ा हथियार निर्माण केंद्र है, जो नक्सलियों की रीढ़ साबित होता था। इस ऑपरेशन से उनकी आपूर्ति शृंखला को बड़ा नुकसान पहुँचा है।”
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राज्य सरकार की प्रतिक्रिया:
राज्य के गृहमंत्री ने इस कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा —
“यह माओवादी नेटवर्क के खिलाफ निर्णायक वार है। आने वाले समय में हम जंगलों में छिपे हर ठिकाने को खत्म करेंगे।”
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सुकमा: नक्सल आंदोलन का केंद्र
सुकमा जिला लंबे समय से नक्सली हिंसा का गढ़ रहा है। यहाँ 200 से अधिक नक्सली घटनाएँ पिछले 5 वर्षों में दर्ज हुई हैं।
राज्य सरकार ने हाल ही में यहाँ “Operation Samadhan” के तहत सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ाई है, जिसका असर अब साफ दिखने लगा है।