रायपुर: एम.ए. छत्तीसगढ़ी छात्र संगठन ने राज्य के सभी नवनिर्वाचित सांसदों को पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग की है।
छात्र संगठन के प्रदेश अध्यक्ष ऋतुराज साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ी भाषा पर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। राज्य की जनता ने लगातार 9 से 10 सांसद भाजपा को भेजे हैं। अगर ये सभी सांसद मिलकर संसद में भाषा के लिए आवाज उठाएंगे तो निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ी आठवीं अनुसूची में शामिल हो जाएगी। अब तक कई सांसदों ने प्रयास किए हैं, लेकिन सभी ने अलग-अलग सत्रों में मांग रखी है। अगर एक सत्र में इस मांग को सभी मिलजुलकर उठाते हैं तो निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ी आठवीं अनुसूची में शामिल हो जाएगा। यह सत्र 24 जून से शुरू होने वाला है। उम्मीद है कि राज्य की जनभाषा / राजभाषा / संपर्क भाषा छत्तीसगढ़ी को मान-सम्मान सभी नवनिर्वाचित सांसद लोग जरूर इस मांग को गंभीरता से उठाएंगे।
आगे ऋतुराज साहू ने बताया कि छत्तीसगढ़ी की अपनी लिपि, शब्दकोश, व्याकरण और पर्याप्त साहित्य मौजूद है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ी बहुत बड़े भू-भाग में बोली जाती है। कई आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं का कोई स्वतंत्र राज्य नहीं है, जैसे सिंधी, उर्दू, बोडो, मैथिली। लेकिन छत्तीसगढ़ का गठन भाषाई आधार पर एक अलग स्वतंत्र प्रदेश छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ी के आधार पर बनाया गया है। वर्तमान में इसमें मास्टर डिग्री में एम.ए. छत्तीसगढ़ी के साथ लघु शोध, पीएचडी और डी.लिट भी किए जा रहे हैं। लोक कला, लोक संस्कृति, लोक नाट्य और भाषाई गुणों से सम्पन्न छत्तीसगढ़ी आज यहां के ढाई करोड़ लोगों की मातृभाषा है।
हबीब तनवीर, तीजनबाई, सुरेन्द्र दुबे, अनुज शर्मा, ममता चन्द्राकर, उषा बारले, ऋतु वर्मा, सुरुज बाई खांडे, पुनाराम निषाद, अजय मंडावी जैसे लोगों ने छत्तीसगढ़ी के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धि हासिल की है। इसके अलावा फिल्म जगत में छत्तीसगढ़ी को कई पुरस्कार मिल चुके हैं। प्रधानमंत्री जी भी छत्तीसगढ़ आने पर खुद को छत्तीसगढ़ी बोलने से नहीं रोक पाते हैं। उनका उद्बोधन छत्तीसगढ़ी में शुरू होता है। छत्तीसगढ़ी में भाषाई गुण मौजूद हैं। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए, छत्तीसगढ़ी छात्र संगठन ने सभी सांसदों से संसद में छत्तीसगढ़ी की आवाज उठाने का आग्रह किया है। संगठन ने उम्मीद जताई है कि सभी सांसद छत्तीसगढ़ी को आठवीं अनुसूची में शामिल कराएंगे।