रायपुर। इंडिया टुडे–CVoter के Mood of the Nation (MOTN) सर्वे में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है। अगस्त 2025 के सर्वे के अनुसार, प्रदेश के 41.9% नागरिक उनके कामकाज से संतुष्ट नजर आए। यह फरवरी 2025 के 39% संतुष्टि स्तर से करीब 2.9 प्रतिशत अंक की बढ़त है। बड़े राज्यों की श्रेणी में वे दूसरे स्थान पर हैं, जबकि पहले स्थान पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा काबिज हैं।
बड़े राज्यों में दूसरे स्थान पर साय
सर्वे से स्पष्ट होता है कि छत्तीसगढ़ में साय की स्वीकार्यता लगातार मजबूत हो रही है। बड़े राज्यों की श्रेणी में 41.9% संतुष्टि हासिल कर उन्होंने कई अन्य मुख्यमंत्रियों को पीछे छोड़ा है। यह बताता है कि उनकी नीतियां और कामकाज राज्य की जनता के बीच सकारात्मक असर डाल रहे हैं।
क्यों बढ़ा जनता का विश्वास?
साय सरकार ने हाल के महीनों में सुशासन तिहार और शिकायत निवारण शिविरों के जरिए सीधे जनता से संवाद स्थापित किया। इन कार्यक्रमों से न केवल सरकारी योजनाओं का वास्तविक क्रियान्वयन सुनिश्चित हुआ बल्कि प्रशासनिक खामियों को भी पहचाना गया और उनका समाधान किया गया। इससे आम लोगों में सरकार के प्रति भरोसा बढ़ा।
इसके अलावा, सीएम सचिवालय की सतत मॉनिटरिंग व्यवस्था ने विभागों और जिला प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित की। ई-ऑफिस सिस्टम के चलते फाइलों का निराकरण तेज हुआ और योजनाओं का लाभ तेजी से लोगों तक पहुंचा।
मोदी की गारंटी पूरी करने पर जोर
राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री की गारंटी योजनाओं को धरातल पर उतारने में तेजी दिखाई। प्रधानमंत्री आवास योजना, महतारी वंदन और कृषक उन्नति योजना जैसी योजनाओं से गरीब, महिला और किसान वर्ग में संतोष बढ़ा। वहीं, भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता, रोजगार और निवेश को प्रोत्साहन देकर युवाओं और कारोबारियों में नई उम्मीद जगाई।
ईमानदार और निर्णायक छवि
साय की सरल, सौम्य और ईमानदार छवि जनता के बीच उनकी स्वीकार्यता को और मजबूत कर रही है। वे गुटबाजी से दूर रहते हुए त्वरित निर्णय लेने के लिए जाने जाते हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख और विभिन्न क्षेत्रों में किए गए सुधारों से भी शासन के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ा है।
बड़े राज्यों के लोकप्रिय मुख्यमंत्री:
हिमंता बिस्वा सरमा (असम) – 44.6% संतुष्टि दर
विष्णु देव साय (छत्तीसगढ़) – 41.9%
भूपेंद्र पटेल (गुजरात) – 40.7% (फरवरी में 54%)
योगी आदित्यनाथ (उत्तर प्रदेश) – 40.4% (फरवरी में 37%)
चंद्रबाबू नायडू (आंध्र प्रदेश) – 38.1% (फरवरी में 47%)
मोहन चरण मांडी (ओडिशा) – 34.2% (फरवरी में 39%)
ममता बनर्जी (पश्चिम बंगाल) – 30.1% (फरवरी में 46%)
भगवंत मान (पंजाब) – 29.9% (फरवरी में 17%)

