रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायकों ने सीएसआर फंड के वितरण में पक्षपात का आरोप लगाते हुए कलेक्टर के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि मंत्री कलेक्टर को निर्देश ही नहीं दे सकते, तो उनके पद का औचित्य क्या रह जाता है।
प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक ब्यास कश्यप ने जांजगीर जिले में सीएसआर फंड के उपयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें पारदर्शिता की कमी है। जनप्रतिनिधियों की अनुशंसाओं को नजरअंदाज किया जा रहा है और कलेक्टर अपनी इच्छा से राशि का वितरण कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जनप्रतिनिधियों की समिति की भूमिका पूरी तरह से खत्म हो गई है।
इस पर उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने जवाब देते हुए कहा कि सीएसआर फंड के लिए कोई औपचारिक समिति नहीं है और इसका उपयोग गांवों के विकास कार्यों में किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि विधायक की ओर से दो प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
इस पर कांग्रेस विधायक ने मंत्री से प्रस्तावों की घोषणा करने और कलेक्टर को आवश्यक निर्देश देने की मांग की। हालांकि मंत्री ने स्पष्ट किया कि उन्हें इस तरह की घोषणा करने का अधिकार नहीं है। इस पर भूपेश बघेल ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब मंत्री ही निर्देश देने में सक्षम नहीं हैं, तो उनकी भूमिका पर प्रश्न खड़े होते हैं।

