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डोलोमाइट उत्खनन में बड़ा घोटाला, नियमों की धज्जियां उड़ा रहे व्यापारी

सक्ती: छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में डोलोमाइट उत्खनन में बड़े पैमाने पर नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। जिले में डोलोमाइट का भारी भंडार होने के कारण कई व्यापारी यहां क्रेशर उद्योग लगाकर मालामाल हो गए हैं, लेकिन अब इनकी लालच इतनी बढ़ गई है कि वे खनिज नियमों की अनदेखी कर बेरोकटोक उत्खनन कर रहे हैं।

30 साल की मंजूरी 5 साल में खत्म

डोलोमाइट उत्खनन के लिए आमतौर पर खनिज अधिनियम के तहत 30 साल की मंजूरी दी जाती है। माइनिंग प्लान के अनुसार ही उत्खनन करना होता है, लेकिन कई व्यापारी 30 साल की अवधि में निकाले जाने वाले पत्थर को महज 5-6 साल में ही निकाल ले रहे हैं। दिन-रात ब्लास्टिंग करके वे खदानों को खाली कर रहे हैं और फिर उन्हें भरकर छोड़ रहे हैं।

छीता पंडरिया गांव में हुआ खुलासा

सक्ती जिले के छीता पंडरिया गांव में गुरुश्री मिनरल्स नामक कंपनी ने खनिज विभाग से वर्ष 2041 तक डोलोमाइट उत्खनन की अनुमति ली थी। लेकिन कंपनी ने 5-6 साल में ही 30 लाख टन पत्थर निकाल लिया और अब खदान को भरने की तैयारी कर रही है।

जमीन मालिक की शिकायत के बाद मामला आया सामने

जब जमीन के मालिक रघुवीर सिंह को इस बात का पता चला तो उन्होंने खनिज विभाग से शिकायत की। रघुवीर सिंह ने अपनी जमीन गुरुश्री मिनरल्स को 30 साल के लिए लीज पर दी थी, लेकिन कंपनी ने नियमों का उल्लंघन करते हुए अत्यधिक उत्खनन किया।

खनिज विभाग की जांच में गड़बड़ी

खनिज विभाग ने रघुवीर सिंह की शिकायत पर जांच की, लेकिन जांच रिपोर्ट में गुरुश्री मिनरल्स द्वारा किए गए वास्तविक उत्खनन से बहुत कम उत्खनन दिखाया गया। रघुवीर सिंह का आरोप है कि खनिज विभाग के अधिकारियों ने कंपनी को बचाने के लिए जांच रिपोर्ट में गड़बड़ी की है।

सरकार को हो रहा करोड़ों का नुकसान

रघुवीर सिंह का कहना है कि गुरुश्री मिनरल्स ने सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगाया है। कंपनी ने अवैध उत्खनन करके सरकार को करीब 50 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया है।

अधिकारी कर रहे रघुवीर सिंह को परेशान

रघुवीर सिंह लगातार अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं ताकि उनकी शिकायत पर निष्पक्ष जांच हो सके। लेकिन खनिज विभाग के अधिकारी उनकी शिकायत को दबाने की कोशिश कर रहे हैं।

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